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Tuesday, March 31, 2015

वर्ष के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुने गये बीरेंद्र लाकड़ा और वंदना कटारिया

हॉकी इंडिया (एचआई) ने आज वार्षिक पुरस्कारों के विभिन्न श्रेणियों के अन्तर्गत खिलाड़ियों के सम्मानित किया। एचआई ने अपने पहले वार्षिक पुरस्कारों के तहत कुल 2 करोड़ 81 लाख 50 हजार रुपये खर्च किये। समारोह के दौरान 148 खिलाड़ियों को पुरस्कार दिये गये। अनुभवी मिडफील्डर बीरेंद्र लाकड़ा और फारवर्ड वंदना कटारिया को आज यहां पहले सालाना हॉकी इंडिया पुरस्कारों में क्रमश: सर्वश्रेष्ठ पुरूष और महिला खिलाड़ी चुना गया।  यहां रंगारंग कार्यक्रम के बीच हुए पहले हॉकी इंडिया पुरस्कारों में कुल दो करोड़ 81 लाख 50 हजार रुपये के पुरस्कार पिछले साल सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों, सहयोगी स्टाफ और हॉकी को विशिष्ट योगदान देने वालों को प्रदान किये गए। वर्ष के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी के ध्रुव बत्रा पुरस्कार के तौर पर वंदना और बीरेंद्र को 25-25 लाख रूपये प्रदान किये गए।
वर्ष के सर्वश्रेष्ठ उदीयमान अंडर 21 खिलाड़ी का जुगराज सिंह पुरस्कार हरमनप्रीत सिंह और महिला खिलाड़ी के लिये असुंथा लाकड़ा पुरस्कार नमिता टोप्पो को दिया गया। वहीं वर्ष के सर्वश्रेष्ठ गोलकीपर का बलजीत सिंह पुरस्कार भारतीय टीम के गोलकीपर पी आर श्रीजेश को मिला।
वर्ष 2014 के सर्वश्रेष्ठ डिफेंडर का पुरस्कार महिला टीम की डिफेंडर दीपिका को मिला। वहीं सर्वश्रेष्ठ मिडफील्डर का अजितपाल सिंह पुरस्कार भारतीय पुरूष टीम के मनप्रीत सिंह को और सर्वश्रेष्ठ फारवर्ड का धनराज पिल्लै पुरस्कार आकाशदीप सिंह को मिला। इन सभी को पुरस्कार के तौर पर पांच-पांच लाख रूपये दिये गए। बेहतरीन उपलब्धि के लिये हॉकी इंडिया अध्यक्ष का विशेष पुरस्कार स्टिक टू हॉकी डॉटकाम के आर अरूमुघम को दिया गया। वहीं सर्वश्रेष्ठ कोच और सहयोगी स्टाफ के लिये जमन लाल शर्मा पुरस्कार जूनियर टीम के कोच हरेंद्र सिंह को मिला।

इस मौके पर पिछले साल अर्जुन पुरस्कार के लिये हॉकी इंडिया ने जिन सात खिलाड़ियों के नाम की अनुशंसा की थी, उन्हें भी दो-दो लाख रूपये नकद पुरस्कार और ट्राफी दी गई। इनमें फारवर्ड तुषार खांडकर, शिवेंद्र सिंह, धरमवीर सिंह गोलकीपर भरत छेत्री, डिफेंडर वी आर रघुनाथ और महिला खिलाड़ी रितु रानी और जायदीप कौर शामिल है। इनमें से किसी को अर्जुन पुरस्कार नहीं मिला था।
200 अंतरराष्ट्रीय मैच पूरे करने वाले भारतीय टीम के कप्तान सरदार सिंह, महिला कप्तान रितु रानी और सौ अंतरराष्ट्रीय मैच पूरे करने वाले पी आर श्रीजेश, वंदना कटारिया, मनप्रीत सिंह, रूपिंदर पाल सिंह, सौंदर्या येंडाला, सविता के अलावा अंपायर जावेद शेख को भी विशेष पुरस्कार दिये गए।
व्यक्तिगत पुरस्कारों में पहले मैच में गोल करने वाली गुरजीत कौर, वर्ष के सर्वश्रेष्ठ एएचएफ खिलाड़ी चुने गए मनप्रीत सिंह, चैम्पियंस ट्राफी में सर्वश्रेष्ठ गोलकीपर रहे पी आर श्रीजेश, सबसे उर्जावान खिलाड़ी रहे एस वी सुनील, नाल्को फैंस च्वाइस पुरस्कार जीतने वाले सरदार सिंह और सर्वश्रेष्ठ जूनियर खिलाड़ी रहे आकाशदीप सिंह को भी एक एक लाख रूपये दिये गए।

इनके अलावा राष्ट्रमंडल खेल 2014 में रजत पदक जीतने वाली पुरूष टीम के हर सदस्य को एक एक लाख रूपये और सहयोगी स्टाफ को 50-50 हजार रूपये दिये गए। इतनी ही राशि एफआईएच विश्व लीग का दूसरा चरण जीतने वाली भारतीय महिला टीम और सहयोगी स्टाफ को दी गई।

चौथा सुल्तान जोहोर कप जीतने वाली जूनियर पुरूष टीम को एक एक लाख रूपये और सहयोगी स्टाफ को 50-50 हजार रूपये मिले। एशियाई खेल 2014 में स्वर्ण पदक जीतकर रियो ओलंपिक 2016 के लिये सीधे क्वालीफाई करने वाली पुरूष टीम के प्रत्येक सदस्य को ढाई-ढाई लाख रूपये और ट्राफी और सहयोगी स्टाफ को एक एक लाख रूपये दिये गए। उन्हें यह पुरस्कार खेलमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने प्रदान किया। एशियाई खेल कांस्य पदक विजेता महिला टीम के प्रत्येक सदस्य को एक-एक लाख रूपये और सहयोगी स्टाफ को 50-50 हजार रूपये मिले।































सरदार बलबीर सिंह सीनियर को मेजर ध्यानचंद एचिवमेंट पुरस्कार


हॉकी के महान खिलाड़ी सरदार बलबीर सिंह सीनियर को हॉकी इंडिया द्वारा आयोजित वार्षिक पुरस्कार समारोह 2014 में मेजर ध्यानचंद एचिवमेंट पुरस्कार से सम्मानित किया गया। पुरस्कार स्वरुप उन्हें 30 लाख रुपये व स्मृति चिन्ह व प्रमाण पत्र दिया गया।
90 वर्षीय सरदार बलबीर सिंह सीनियर का जन्म , 10 अक्टूबर 1924हरिपुर, पंजाब में हुआ था। बलबीर सिंह भारत के ऐसे हॉकी खिलाड़ी हैं जिन्होने ओलम्पिक में रिकॉर्ड बनाया है ।


बलवीर सिंह भारत की उन तीन ओलम्पिक टीमों में शामिल थे जिसने स्वर्ण पदक जीता (लन्दन-1948, हेलसिंकी-1952 और मेलबोर्न-ओलम्पिक 1956 । उन्होने 1952 के ओलम्पिक में नीदरलैण्ड के विरुद्ध पांच गोल किये थे जो अभी तक रिकॉर्ड है । उन्हें प्रायः 'बलबीर सिंह सीनियर' कहा जाता है, ताकि हॉकी के दूसरे खिलाड़ी से भ्रम न हो ।

Tuesday, October 19, 2010

नाच न जाने आँगन टेढ़ा

लाहौर। पाकिस्तान भारत को हमेशा नीचा दिखने की फ़िराक में लगा रहता है फिर वो चाहे राजनीति हो या खेल का मैदान। 19 वें राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के हाथों 7-4 से करारी शिकस्त झेलने के बाद अपने आपको बचाते हुए पाकिस्तान ने हार का ठीकरा भारतीय दर्शकों पर ही फोड़ दिया। अब पाकिस्तानियों को कौन समझाए कि खेल में प्रदर्शन अहम् होता हैं न कि दोषारोपण। भारतीय टीम जब पाकिस्तान में होती है तो उनपर भी दर्शक हुटिंग करते हैं भारतीय टीम तो कभी इस बात का रोना नहीं रोती।  

खैर पाकिस्तानियों ने अपने देश में खेलप्रेमियों के गुस्से से बचने के लिए भारतीय दर्शकों को ही हथियार बना लिया है।

पाकिस्तानी हॉकी टीम के कप्तान जीशान अशरफ ने कहा है कि राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान उनकी टीम को भारतीय दर्शकों के दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा है। नवंबर, 2008 के मुंबई हमले के बाद से भारतीय दर्शक पाकिस्तानी टीम के साथ उग्रता से पेश आते रहे हैं। खेलों के दौरान दर्शकों ने खिलाड़ियों से अपशब्द भी कहे, जिसका असर हमारे प्रदर्शन पर भी पड़ा।

पाकिस्तान हॉकी फेडरेशन (पीएचएफ) के सचिव आसिफ बाजवा ने भी भारतीयों पर आरोप लगते हुए कहा कि खिलाड़ियों को खेल के दौरान कठोर अपशब्दों का सामना करना पड़ा। भारतीय दर्शकों ने उनकी बेइज्जती भी की। मुंबई हमले के बाद पाकिस्तानी खिलाड़ियों के प्रति भारतीय दर्शकों का रवैया बदला है।

उल्लेखनीय है कि भारतीय हॉकी टीम ने विश्वकप और राष्ट्रमंडल खेलों में पाकिस्तान खिलाफ जीत दर्ज की थी। राष्ट्रमंडल खेलों में पाकिस्तानी टीम छठे स्थान पर थी।

Monday, August 16, 2010

लोकप्रिय खेलों की रोमांचक शब्दावली-"फुटबाल और हॉकी-"


फुटबाल दुनिया में सबसे ज्यादा खेले जाने वाले लोकप्रिय खेलों में शुमार है। जब यह खेला जाता है तो दर्शकों की इस खेल के प्रति दिवानगी देखते ही बनती है। इसको खेलना जितना मनोरंजक है, उतना ही इसमें प्रयुक्त होने वाली शब्दावली रोमांचित करने वाली है, तो आइये देखते हैं क्या है इस खेल की शब्दावली-

मिड फील्ड, सेंटर, स्ट्राइकर , पास, बैक पास, गोली, कार्नर, फारवर्ड, पेनल्टी, किक, डायरेक्ट किक, इनडायरेक्ट किक, फ्री किक, ड्रिबल, एक्स्ट्रा टाइम, फाउल, गोल, रेफरी, लाइंसमैन, ऑफ साइड, सीजर्स किक, बनाना किक, विंगर, स्वीपर, बैक, थ्रो इन, वाली, टच लाइन, सेंड ऑफ, नेट, बार्स, टाईब्रेकर, सडेन डेथ, कार्नर फ्लैग, कार्नर किक, फिस्ट, फर्स्ट हाफ, सेकेण्ड हाफ, लॉब, टैकेल, स्लाइडिंग टेकेल, ऑफ साइड, हैट्रिक, हैंडबाल, चिप, फेयर चार्ज, फार पोस्ट, बुकिंग, क्रास, किक आफ, गोल किक, मार्किंग, बाल पास, थ्रू वाल, टोटल फुटबाल, गोल्डन गोल, आदि।

प्रमुख शब्दों का विस्तार-
थ्रो इन- जब गेंद भूमि पर अथवा हवा में स्पर्श रेखा को पार करके पारित रेखा स्थल से अन्त में गेंद स्पर्श करने वाले खिलाड़ी के विपक्षी दल के किसी खिलाड़ी द्वारा किसी दिशा में अन्त:क्षेपित की जाए, तो इसे थ्रो इन कहते हैं।

ऑफ साइड- यदि कोई खिलाड़ी गेंद की अपेक्षा स्वयं विपक्षी गोल रेखा के निकटतम और अपनी ही टीम के खिलाड़ी को सीधा पास दे अथवा चला जाए तो उसे ऑफ साइड कहते हैं।

पेनल्टी किक- नियम विरूध्द खेलने पर किक करने का एक अवसर।

गोल्डन गोल- निर्धारित समय में मैच बराबर न होने की दशा में अतिरिक्त समय में बने गोल को गोल्डन गोल कहा जाता है।

हॉकी-
गोली, राइट बैक, लेफ्ट बैक, आउट साइड राइट, इनसाइड राइट, सेंटर फारवर्ड, इनसाइड लेफ्ट, आउट साइड लेफ्ट, सेटर हाफ, सेंटर लाइन , कार्नर, पेनल्टी स्ट्रोक, पेनल्टी कार्नर, फ्लिक, स्कूप, स्टिक, अम्पायर, लाइन्समैन, हाफ वाली, इनफ्रिंजमेंट, साइड लाइन, टाई ब्रेकर, सडेन डेथ, हैट्रिक, अण्डर कटिंग, सर्किल, बुली, रोड आन, पुश इन, शूटिंग सर्किल।

प्रमुख शब्दों के विस्तार-
बुली- खेल प्रारम्भ होने के समय हॉकी बाल को मारना बुली कहलाता है।

फ्री हिट- जब विपक्षी टीम गेंद को स्वतंत्र रूप से मारती है तो उसे फ्री हिट कहते हैं।

ड्रिब्लिंग- यह हॉकी गेंद को नियंत्रित करने की एक कला है।

जैब एण्ड लंग- गेंद को देना या बाहर करना 'जैब एण्ड लंग' कहलाता है।

पेनाल्टी कॉर्नर- नियम का उल्लंघन करने पर गोल करने का एक अवसर देना 'पेनाल्टी कार्नर' कहलाता है।

पेनाल्टी स्ट्रोक- यह गोल करने का एक आसान अवसर है।

डी- यह अर्ध्दवृत्ताकार एक रेखा है, जो गोल पोस्ट को घेरे रहती है।

एस्ट्रोटर्फ- यह कृत्रिम घास का एक ऐसा मैदान है, जो आधुनिक तकनीक से लोहे के तार पर प्लास्टिक चढ़ाकर बनायी गयी कृत्रिम घास से निर्मित होता है।

Friday, August 13, 2010

हॉकी में ‘चक दे’ इण्डिया


खेलों की दुनिया में भारत को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने में हॉकी का बहुत बड़ा योगदान रहा है। हॉकी में भारत न सिर्फ विश्वविजेता रहा है बल्कि विश्व ओलिम्पक में लगातार 6 बार स्वर्ण पदक जीतने का भी विश्व रिकार्ड बनाया है।

आधुनिक स्तर पर खेले जाने वाले इस खेल का जन्म उन्नीसवीं शताब्दी में इंग्लैंड में हुआ। तब हॉकी इंग्लैंड के पब्लिक स्कूलों में खेला जाता था। उस समय इस खेल में गेंद या फिर गेंद के गोल तख्त को डंडे से मारकर विरोधी खेमे केगोल या पाले में डाला जाता था। बाद में इस खेल में चमड़े की गेंद और एक विशेष आकार वाले लकड़ी के डंडे का प्रयोग होने लगा।

हॉकी की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता का शुभारम्भ सर्वप्रथम सन्1895 में हुआ जिसमें आयरलैंड ने वेल्स को शून्य के मुकाबले तीन गोल से हराया था। इस खेल से संबंधित अंतरराष्ट्रीय नियमों का गठन भी 1895 में ही हुआ जिसका सर्वप्रथम प्रयोग सन् 1908 में लंदन में आयोजित ओलंपिक खेलों के दौरान हुआ।1924 में अंतरराष्ट्रीय हॉकी संघ की स्थापना पेरिस में की गयी।1970 के दशक से हॉकी में कृत्रिम घासयुक्त मैदान का प्रयोग किया जाने लगा। आज विभिन्न प्रकार की राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में कृत्रिम घास के मैदान का प्रयोग किया जाता है।

भारत में हॉकीः विरासत और हकीकत
हॉकी हमारे देश का राष्ट्रीय खेल है। सर्वप्रथम सन् 1885 में राष्ट्रीय हॉकी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पहले हॉकी क्लब की स्थापना कोलकाता में की गई। ओलिम्पक खेलों में भारतीय हॉकी का वर्चस्व रहा है। ओलिम्पक खेलों में भारतीय हॉकी का प्रथम प्रवेश सन् 1928 में हुआ जिसमें भारत ने बिना एक भी गोल खाये ओलम्पिक में अपना पहला स्वर्ण पदक जीता। इस जीत में हॉकी के महान भारतीय खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद का शानदार प्रदर्शन रहा। मेजर ध्यानचंद को “हॉकी का जादूगर”कहा जाता था।

उन्होंने सन् 1928 से 1956 तक भारतीय हॉकी टीम में एक खिलाड़ी तथा कप्तान के रूप में बेहतरीन प्रदर्शन किया। उस दौर की हॉकी को ‘भारतीय हॉकी का स्वर्ण युग’कहा जाता है। इस दौरान इनके बेहतरीन खेल की बदौलत भारत ने लगातार 6 ओलिम्पक स्वर्ण पदक और 24 मैच जीते।इन मैचों में भारत की तरफ से 178 गोल हुए थे और विरोधी टीम द्वारा केवल 7 गोल किये गये। किसी देश के लिए इससे बड़ी गौरव की बात और क्या हो सकती है?

हॉकी के इस स्वर्णिम काल में भारत ने अपने दमदार खेल से पूरे विश्व का सम्मान पाया और खिलाड़ियों ने विश्व पटल पर देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। मेजर ध्यानचंद के अलावा जिन खिलाड़ियों ने अपने खेल से देश का नाम रोशन किया उनमें लगभग तीन दशकों तक अपना योगदान देने वाले बलबीर सिंह का नाम भी प्रमुख है। यह सिर्फ संयोग ही है कि इस नाम के चार और खिलाड़ियों ने भी भारतीय टीम में अपनी जगह बनायी। भारतीय हॉकी का यह स्वर्ण युग 1960 के रोम ओलिम्पक में खत्म हुआ जब फाइनल मैच में पाकिस्तान ने भारत को हरा दिया। भारतीय टीम द्वारा बनाये गये इस ओलिम्पक रिकार्ड को तोड़ने की बात तो दूर अभी तक कोई भी देश इसके आस-पास भी नहीं पहुंचा है।