Wednesday, March 25, 2015

खेलों के लिहाज से वर्ष 2014 रिकॉर्ड और कारनामों के नाम रहा

खेलों के लिहाज से वर्ष 2014 रिकॉर्ड और कारनामों के नाम रहा। जर्मनी फुटबॉल वर्ल्ड चैंपियन बना। राष्ट्रमंडल खेलों में एक बार फिर से इंग्लैंड का दबदबा रहा। एशियाई खेलों में चीन ने फिर से बाजी मारी।
एशियन खेल
दक्षिण कोरियाई शहर इंचॉन में 17वें एशियन खेलों का आयोजन हुआ। भारत इन खेलों में शीर्ष 10 में जगह बनाने में सफल रहा जबकि चीन ने अपनी बादशाहत जारी रखते हुए लगातार नौंवीं बार पहला नंबर बनाए रखा। इस बार 45 देशों ने 36 इवेंट्स में भाग लिया था। इसके बाद अगले एशियन खेल के मेजबान इंडोनेशिया को मशाल सौंपी गई। भारत ने इस स्पर्धा में 57 मेडल जीते। जिसमें 11 स्वर्ण, 9 रजत और 37 कांस्य पदक शामिल हैं।
फुटबॉल
मारियो गोट्जे के अतिरिक्त समय में किए गए गोल से जर्मनी फाइनल में अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर फुटबॉल का विश्वचैंपियन बन गया। क्रिकेट, हॉकी, बैडमिंटन और कबड्डी में लीग फॉर्मेट की सफलता के बाद फुटबॉल की दुनिया में भी ऐसा ही ऐतिहासिक कदम उठाया गया। करीब 700 करोड़ रुपये के करार के बाद इंडियन सुपर लीग की योजना बनी। इस लीग में आठ टीमों ने हिस्सा लिया। इस लीग की चैम्पियन सौरव गांगुली के स्वामित्व वाली कोलकाता बनी। फाइनल में कोलकाता ने सचिन तेंदुलकर के स्वामित्व वाली केरला ब्लस्टर को हराया।  इसकी कुल इनामी राशि 35 करोड़ रुपये थी।
रियाल मैड्रिड की टीम यूरोप की क्लब फुटबॉल चैंपियन बन गई। यूएएफा चैंपियंस लीग के खिताबी मुकाबले में रियाल मैड्रिड की टीम ने एटलेटिको मैड्रिड को 4-1 से हरा दिया। इंग्लैंड के फुटबॉल क्लब मैनचेस्टर सिटी ने वर्ष 2013-14 का इंग्लिश प्रीमियर लीग खिताब जीता। वहीं लिवरपूल खिताब के बेहद करीब आकर भी चैंपियन बनने से वंचित रह गया। एतिहाद स्टेडियम में टूर्नामेंट के फाइनल मुकाबले में वेस्ट हैम पर 2-0 की आसान जीत के साथ ही मैनचेस्टर सिटी ने 2012 के बाद दूसरी बार इस खिताब पर कब्जा कर लिया। उरुग्वे के स्टार फुटबॉलर लुइस सुआरेज ने इटली के खिलाफ मैच के दौरान अपने विपक्षी खिलाड़ी जॉर्जियो चिलिनी के कंधे पर दांतों से काट लिया। इसके बाद फीफा ने उनपर 9 मैच और 4 महीने के लिए प्रतिबंध लगा दिया। सुआरेज पर लगा बैन फुटबॉल के हर प्रारूप पर लागू रहा।
राष्ट्रमंडल खेल
20वें राष्ट्रमंडल खेल का आयोजन स्कॉटलैंड के ग्लासगो शहर में हुआ। 23 जुलाई से शुरू होकर 11 दिन तक चले खेल इस महाकुंभ में 71 देशों के 4929 खिलाड़ियों ने भाग लिया। इन खेलों में भारत ने 15 स्वर्ण, 30 रजत और 19 कांस्य पदक  मिलाकर 64 पदक हासिल किए. पदक तालिका में भारत पांचवें स्थान पर रहा।
टेनिस
शीर्ष वरीयता प्राप्त नोवाक जोकोविच ने अपनी तीखी सर्विस और करारे शॉट की बदौलत रोजर फेडरर का आठवां खिताब जीतने का सपना तोड़कर विंबलडन टेनिस टूर्नामेंट का पुरुष एकल का खिताब जीता। जोकोविच ने पहला सेट गंवाने के बाद शानदार वापसी की। करीब चार घंटे तक चले मैराथन मुकाबले में जोकोविच ने 6-7, 6-4, 7-6, 5-7, 6-4 से जीत दर्ज की। चेकोस्लोवाकिया की पेट्रा क्विटोवा ने 5 जुलाई 2014 को विंबलडन टेनिस ओपन 2014 का महिला एकल का खिताब जीता। पेट्रा ने कनाडा की जिनी बोकार्ड को 6-3, 6-0 से हराकर अपना दूसरा विंबलडन खिताब जीता। क्विटोवा ने वर्ष 2011 में मारिया शारापोवा को हरा कर अपना पहला विंबलडन खिताब जीता था। स्विट्जरलैंड के स्टानिस्लास वावरिंका ने मेलबर्न में स्पेन के राफेल नडाल को 6-3, 6-2, 3-6, 6-3 से हरा कर ऑस्ट्रेलियाई ओपन 2014 का पुरुष एकल खिताब जीता। आठवीं वरीयता प्राप्त स्टानिस्लास वावरिंका के कैरियर का यह पहला ग्रैंड स्लैम खिताब है।
चीन की ली ना ने वर्ष के पहले ग्रैंड स्लैम ऑस्ट्रेलियन ओपन का महिला एकल खिताब जीता। दो बार की उपविजेता ली ना ने फाइनल मुकाबले में 20वीं वरीय स्लोवाकिया की डोमीनिका सिबुलकोवा को सीधे सेटों में मात देकर करियर के दूसरे ग्रैंड स्लैम खिताब पर कब्जा कर लिया। खिताबी मुकाबले में ली ना ने सिबुलकोवा को 7-6(7-3), 6-0 से हराया।
क्रोएशिया के मारिन सिलिच ने जापान के केई निशिकोरी को हराकर साल के अंतिम ग्रैंड स्लैम अमेरिकी ओपन का पुरुष एकल खिताब जीत लिया। दिग्गजों को चौंकाकर फाइनल में जगह बनाने वाले टूर्नामेंट के 14वें वरीय खिलाड़ी सिलिच ने 10वें वरीय निशिकोरी को सीधे सेटों में 6-3, 6-3, 6-3 से हराया।
सेरेना विलियम्स ने इस साल का यूएस ओपन टेनिस प्रतियोगिता का महिला सिंगल्स खिताब जीता। न्यूयॉर्क में खेले गए फाइनल मुकाबले में सेरेना ने डेनमार्क की 10वीं वरीयता प्राप्त कैरोलाइन वोजनियाकी को हरा कर लगातार तीसरी बार यूएस ओपन का सिंगल्स खिताब जीता राफेल नडाल ने फ्रेंच ओपन 2014 के फाइनल में नोवाक जोकोविच को हराकर खिताब अपने नाम किया। मेंस सिंगल्स के फाइनल में नडाल ने जोकोविच को 3-6 7-5 6-2 6-4 से हराया। रूसी टेनिस स्टार मारिया शारापोवा ने रोमानिया की सिमोना हालेप को हराकर करियर के दूसरे फ्रेंच ओपन का खिताब अपने नाम किया। इस रूसी बाला ने 6- 4, 6-7 (5-7), 6-4 से जीत दर्ज की।
सानिया मिर्जा-ब्रूनो सोरेस की जोड़ी ने अमेरिकी ओपन के मिक्स्‍ड डबल इवेंट का खिताब जीता। मिर्जा और सोरेस की जोड़ी ने अमेरिका की एबिगेल स्पीयर्स और मैक्सिको के सैंटियागो गोंजालेस को 6 -1, 2 - 6, 11 - 9 से हराया।
बैडमिंटन
भारतीय महिला बैडमिंटन टीम ने इतिहास रचते हुए पहली बार उबेर कप का कांस्य पदक जीता। भारत ने इंडोनेशिया को 3-0 से मात देकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया। हालांकि सेमीफाइनल में भारतीय टीम को हार का सामना करना पड़ा। भारतीय युवा बैडमिंटन खिलाड़ी किदांबी श्रीकांत ने सनसनीखेज प्रदर्शन करते हुए ओलंपिक चैंपियन चीन के लिन दान को हराकर चाइना ओपन सुपर सीरीज का खिताब जीत लिया। श्रीकांत ने दान को लगातार गेमों में 21-19, 21-17 से शिकस्त दी। भारत की शान बैंडमिंटन खिलाड़ी सायना नेहवाल ने एक रोमांचक मुकाबले के बाद चाइना ओपन सुपर सीरीज का फाइनल मुकाबला जीत लिया। सायना ने फाइनल मुकाबले में यामा गुची को 21-12, 22-20 से हराकर चीनी ओपन प्रीमियर खिताब अपने नाम किया। भारत की नंबर वन महिला शटलर सायना नेहवाल ने ऑस्ट्रेलियाई ओपन सीरीज के खिताब पर कब्जा किया। शानदर प्रदर्शन करते हुए सायना ने स्पेन की कैरोलीना को 21-18, 21- 11 से मात दी।
शतरंज
विश्व शतरंज चैंपियनशिप की 11वीं बाजी में भारतीय चैंपियन विश्वनाथन आनंद को हराने के बाद नॉर्वे के मैग्नस कार्लसन चैंपियन का खिताब बचाने में कामयाब रहे। 11वीं बाजी में आनंद की हार के साथ मैग्नस कार्लसन 4.5 के मुकाबले 6.5 अंकों से जीतकर शतरंज के विश्व चैंपियन बने।
हॉकी
भारतीय हॉकी टीम ने ऑस्ट्रेलिया में खेले गए हॉकी सीरीज में ऐतिहासिक प्रदर्शन किया। टीम ने ऑस्ट्रेलिया को उसी के घर में 3-1 से हराया। भारतीय हॉकी टीम ने 16 साल बाद एशियन खेलों के हॉकी स्पर्धा में स्वर्ण जीता।  भारतीय हॉकी टीम ने पाकिस्‍तान को हराकर स्वर्ण अपने नाम कर लिया। इसी के साथ भारत ने 2016 में रियो-डी जनेरियो में होने वाले ओलंपिक के लिए भी क्‍वालिफाई कर लिया। भारतीय हॉकी कोच टेरी वाल्श ने हॉकी इंडिया और भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के साथ अनुबंध संबंधी बातचीत नाकाम रहने के बाद अपना पद छोड़ दिया।
फॉर्मूला वन
जापानी ग्रां प्री के दौरान हुई दुर्घटना में फॉर्मूला वन ड्राइवर जूलेस बियांची गंभीर रूप से घायल हो गए। सिर में लगी चोट के कारण उनकी हालत बेहद गंभीर हो गई. वे कुछ दिन तक आर्टिफिशियल कोमा में रहे। हालांकि, अब वह इससे बाहर हैं। मर्सिडीज के ब्रिटिश ड्राइवर लुइस हैमिल्टन दूसरी बार फॉर्मूला वन विश्व चैंपियन बने। इससे पहले हैमिल्टन ने 2008 में मैक्लॉरेन टीम के साथ यह उपलब्धि हासिल की थी।
फॉर्मूला वन रेसिंग की दुनिया के शहंशाह रहे माइकल शुमाकर आठ महीने अस्पताल में बिताने के बाद अपने घर लौट आए. शुमाकर स्विट्जरलैंड के मेरीबेल के फ्रेंच स्की रिसोर्ट में स्कीइंग करते हुए दुर्घटना के कारण एक चट्टान से टकरा गए थे। जिसके कारण उनके मस्तिष्क को गहरी चोट पहुंची थी।
ऑस्कर पिस्टोरियस
प्रिटोरिया में पैरालंपिक एथलीट ऑस्कर पिस्टोरियस को गर्लफ्रेंड रीवा स्टीनकैंप की हत्या के मामले में जज ने गैर-इरादतन हत्या का दोषी पाया।
आईलीग
खेलों में लीग का ट्रेंड भारत में शुरू हो चुका है। इस कड़ी में टेनिस भी जुड़ गया। भारतीय टेनिस खिलाड़ी महेश भूपति के दिमाग की उपज इंडियन प्रीमियर टेनिस लीग का पहला सीजन 2014 में खेला जाएगा. लीग में भारत समेत दुनिया के कुछ नामी-गिरामी खिलाड़ी भी हिस्सा लेंगे।भारत के टेनिस स्टार विजय अमृतराज ने चैंपियंस टेनिस लीग की शुरुआत की। इस लीग का आयोजन मुंबई, हैदराबाद, दिल्ली, पुणे, बेंगलुरु और चंडीगढ़ में हुआ। इस लीग को क्रिकेट के इंडियन प्रीमियर लीग के तर्ज पर बनाया गया है।
कुश्ती

भारतीय कुश्ती के लिये वर्ष 2014 काफी अच्छा रहा और इस साल ओलंपिक के नायक सुशील कुमार और योगेश्वर दत्त ने फिर से अच्छा खेल दिखाया जिससे भारत एशियाई खेलों में 28 साल बाद इस स्वर्ण पदक जीतने में सफल रहा। लंदन ओलंपिक 2012 के बाद पहली बार खेलने और फीला के भार वर्ग में तब्दीली के कारण बढ़े वजन वर्गों में भाग लेने वाले सुशील और योगेश्वर ने इस साल जिस टूर्नामेंट में हिस्सा लिया उसमें खुद को साबित किया। योगेश्वर ने तो इंचियोन एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता। यह पिछले 28 वर्षों में कुश्ती में भारत का पहला स्वर्ण पदक था। उनकी निगाहें अब रियो ओलंपिक पर टिकी हैं। योगेश्वर को ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में 60 के बजाय 65 किग्रा भार वर्ग में भाग लेना पड़ा जिसमें उन्होंने सोने का तमगा जीता जबकि दो बार के ओलंपिक चैंपियन सुशील ने 74 किग्रा में सोने का तमगा हासिल किया। उन्होंने फाइनल में पाकिस्तान के कमर अब्बास को चित करके अपनी बादशाहत साबित की थी। इसके बाद सुशील और योगेश्वर ने सितंबर में ताशकंद में विश्व चैंपियनशिप में हिस्सा नहीं लिया। सुशील बाद में एशियाई खेलों में भी नहीं गये लेकिन योगेश्वर इंचियोन पहुंचे और वहां उन्होंने इतिहास रचा। इस बीच भारत के युवा पहलवानों अमित कुमार, बजरंग, राजीव तोमर और महिला पहलवान बबिता कुमारी और विनेश फोगाट ने उन प्रतियोगिताओं में भारतीय तिरंगा उंचा रखा जहां सुशील और योगेश्वर ने हिस्सा नहीं लिया। इन सबके अच्छे प्रदर्शन से भारत ने राष्ट्रमंडल खेलों में पांच स्वर्ण सहित 13 पदक जीते। भारत ने जूनियर एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप में भी एक स्वर्ण, तीन रजत और एक कांस्य पदक हासिल किया। विनेश : 51 किग्रा ने ग्रीको रोमन में स्वर्ण पदक हासिल किया। एशियाई खेलों में भारतीय पहलवानों ने पांच पदक हासिल किये लेकिन फीला विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में उन्हें कोई पदक नहीं मिला। 
लीग प्रारूप को व्यापक तौर पर अपनाने और खेलों की नई अलख जगाने वाला साबित हुआ वर्ष 2014

भारतीय खेल जगत के लिए साल 2014 लीग प्रारूप को व्यापक तौर पर अपनाने और खेलों की नई अलख जगाने वाला साबित हुआ।  फुटबॉल से लेकर टेनिस और फिर कबड्डी तक के लीग टूर्नामेंट इस साल शुरू हुए, जिन्होंने सफलता का नया मानदंड स्थापित किया और देश के खेल प्रशंसकों ने उन्हें हाथों-हाथ लिया।
आईएसएल:
सबसे ज्यादा चर्चा इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) ने बटोरी। भारतीय फुटबॉल वैश्विक स्तर पर भले ही काफी पीछ हो लेकिन फीफा सहित दुनिया के दिग्गज फुटबाल सितारे भी भारत को इस खेल का बड़ा बाजार बताने लगे हैं। आईएसएल की सबसे बड़ी सफलता यह रही कि टूर्नामेंट दर्शकों को फुटबाल स्टेडियम तक लाने में सफल रहा। टूर्नामेंट में कुल 61 मैच खेले गए और आईएसएल के आयोजकों के अनुसार इन मैचों को देखने 10 लाख से ज्यादा दर्शक स्टेडियम तक पहुंचे।
 विश्व कप जीतने वाली इटली की राष्ट्रीय टीम के सदस्य रह चुके दिग्गज खिलाड़ी और आईएसएल में दिल्ली डायनामोज की ओर से खेलने वाले एलेसांद्रो डेल पिएरो ने भी माना कि आईएसएल एक सफल आयोजन रहा। पिएरो ने माना कि पहले संस्करण की शानदार लोकप्रियता देखकर वह खुद भी हैरान हैं।
आईपीटीएल:
 टेनिस की बात करें तो देश में इस खेल से संबंधित दो टेनिस लीग शुरू हुए। महेश भूपति के प्रयास से शुरू हुआ इंटरनेशनल प्रीमियर टेनिस लीग (आईपीटीएल) टेनिस के किसी महोत्सव जैसा साबित हुआ, जिसमें दुनिया के लगभग सभी शीर्ष खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया।
 आईपीटीएल को भारत के खेल इतिहास में इसलिए भी जाना जाएगा, क्योंकि इसने रोजर फेडरर, नोवाक जोकोविक जैसे सर्वोच्च खिलाड़ियों का भारत में पदार्पण करवाया। हालांकि मीडिया में छाया रहा यह टूर्नामेंट मंहगे टिकट के कारण अभी भी आम लोगों से दूर ही रहा।
सीटीएल:
 दूसरी ओर, पूर्व दिग्गज भारतीय खिलाड़ी विजय अमृतराज की पहल पर शुरू हुआ चैम्पियंस टेनिस लीग (सीटीएल) लोकप्रियता के मामले में जरूर पीछे छूट गया।
 प्रो कबड्डी लीग:
कबड्डी के क्षेत्र में लीग प्रारूप के दो बड़े टूर्नामेंट शुरू हुए, प्रो-कबड्डी लीग और विश्व कबड्डी लीग। दोनों टूर्नामेंट को दुनिया भर से 1.8 करोड़ टीवी दर्शक भी मिले।
प्रो कबड्डी लीग में अभिषेक बच्चन, रॉनी स्क्रूवाला और महानायक अमिताभ बच्चन की उपस्थिति ने इस देशी खेल को प्राइम टाइम का लोकप्रिय इवेंट बना दिया और दर्शकों ने जिस तरह इसे प्रतिक्रिया दी वह अभूतपूर्व थी।


एक साल पहले शुरू हुआ बैडमिंटन का लीग टूर्नामेंट 'इंडियन बैडमिंटन लीग' (आईबीएल) व्यस्त अंतर्राष्ट्रीय खेल कार्यक्रमों के कारण इस साल आयोजित नहीं हो सका, लेकिन लीग आधार पर होने वाली इन प्रतियोगिताओं को जहां खेल प्रेमियों का अपार समर्थन मिला, वहीं देश की युवा खेल प्रतिभाओं को विदेशी खिलाड़ियों के साथ खेलने, अपने प्रदर्शन में सुधार और अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए बेहतर मंच भी प्रदान किया है।
भारतीय क्रिकेट के लिए वर्ष 2014 रिकॉर्ड,कारनामों और अदालती मामलों के नाम रहा
भारतीय क्रिकेट के लिए वर्ष 2014 रिकॉर्ड और कारनामों के नाम रहा। एकदिवसीय क्रिकेट में रोहित शर्मा का रिकार्ड दोहरा शतक और विदेशी सरजमीं पर एक बार फिर भारतीय टीम की नाकामी भी खबरों में रही। रोहित ने श्रीलंका के खिलाफ ईडन गार्डन पर नाबाद 264 रन बनाकर एक इतिहास रच दिया।  200 रनों के आंकड़े को सचिन तेंदुलकर ने पहली बार छुआ था, जबकि वीरेंद्र सहवाग और रोहित ने इसे नयी बुलंदियों तक पहुंचाया। हालांकि एकदिवसीय में अच्छे प्रदर्शन के बावजूद टेस्ट में रोहित की फार्म चिंता का कारण बनी रही।

भारत के कई वरिष्ठ खिलाड़ियों के लिये यह वर्ष अच्छा नहीं रहा। कई खिलाड़ियों को भारत की एकदिवसीय टीम से नजरअंदाज किया गया। सहवाग, युवराज सिंह, हरभजन सिंह, जहीर खान और गौतम गंभीर जैसे सीनियर खिलाड़ियों को 2015 विश्व कप के संभावित खिलाड़ियों में जगह नहीं दी गयी।
दूसरी तरफ मैदान के बाहर बीसीसीआई अदालती मामलों में उलझा रहा। उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद श्रीनिवासन का निर्वासन जारी रहा। इसके बावजूद हालांकि वह आईसीसी के पहले अध्यक्ष बनने में सफल रहे और भारत को आईसीसी के राजस्व में अब से बड़ा हिस्सा मिलेगा।

श्रीनिवासन गैर मान्यता प्राप्त क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बिहार के सचिव आदित्य वर्मा द्वारा दायर मुकदमों में उलझे रहे। माना जा रहा है कि वर्मा को श्रीनिवासन के विरोधी ललित मोदी से वित्तीय मदद मिल रही है। नये साल में अब यह देखना होगा कि किसे भारतीय क्रिकेट बोर्ड की कमान मिलती है।
भारत की बात करें तो सहवाग और युवराज जैसे सीनियर खिलाड़ियों को बाहर करने के बावजूद टेस्ट कप्तान के रूप में महेंद्र सिंह धोनी के खराब प्रदर्शन में कोई सुधार नहीं हुआ और भारत ने दक्षिण अफ्रीका, न्यूजीलैंड और इंग्लैंड में सीरीज गंवाई। भारत विश्व टी20 के फाइनल में श्रीलंका से भी हार गया और इसके साथ ही विरोधी टीम के दो दिग्गज खिलाड़ियों महेला जयवर्धने और कुमार संगकारा के टी20 करियर का अंत हुआ।

इंग्लैंड में श्रृंखला गंवाने का निराशाजनक पहलू यह रहा कि क्रिकेट का मक्का कहलाने वाले लार्ड्स पर जीत के साथ बढ़त बनाने के बावजूद भारत को हार का सामना करना पड़ा। इस दौरे पर मोइन अली ने अपनी कामचलाऊ ऑफ स्पिन गेंदबाजी से भारतीय बल्लेबाजों को काफी परेशान करते हुए 19 विकेट चटकाए. ऑफ स्पिनरों के खिलाफ भारत की परेशानी ऑस्ट्रेलिया में भी उजागर हुई जब नाथन लियोन ने मौजूदा श्रृंखला के पहले टेस्ट में 12 विकेट चटकाकर मेजबान टीम को 48 रन से जीत दिलायी। ऑस्ट्रेलिया ने दूसरे टेस्ट में भी भारतीय टीम को 4 विकेट से हराया और श्रृंखला में 2-0 की बढ़त हासिल की। तीसरे टेस्ट के चौथे दिन तक ऑस्ट्रेलिया की स्थिति बेहद मजबूत दिख रही है।

वर्ष 2014 में बल्लेबाजी में मुरली विजय के प्रदर्शन में सबसे अधिक सुधार हुआ। अंजिक्य रहाणे ने मध्य क्रम में अपनी जगह लगभग पक्की की। चेतेश्वर पुजारा और रोहित की फार्म में उतार चढ़ाव देखने को मिला लेकिन इन दोनों में इन मुश्किलों से उबरने की प्रतिभा है।गेंदबाजी हालांकि भारत की चिंता का सबब रही। ईशांत शर्मा, वरुण आरोन और उमेश यादव लगातार अच्छा प्रदर्शन करने में नाकाम रहे। रविंद्र जडेजा और रविचंद्रन अश्विन ऐसे विकेटों पर अपनी अहमियत साबित करने में नाकाम रहे हैं जो स्पिनरों के अनुकूल नहीं हों। युवा स्पिनर अक्षर पटेल ने सीमित मौकों में अपनी प्रतिभा दिखाई लेकिन उनकी असली परीक्षा ऑस्ट्रेलिया में आगामी त्रिकोणीय श्रृंखला में होगी।
भारत का इंग्लैंड दौरा
इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में करारी हार का कसर भारत ने एकदिवसीय श्रृंखला में निकाला। पांच मैचों की श्रृंखला को भारत ने 3-1 से जीत लिया। सीरीज का पहला मैच बारिश के कारण रद्द कर दिया गया था। 2014 में भारत का इंग्लैंड दौरा बेहद ही खराब रहा। पहला टेस्ट मैच ड्रॉ होने और दूसरे टेस्ट में जीत के बाद हर किसी को लगा कि शायद इस बार धोनी के धुरंधर रिकॉर्ड तोड़ने में कामयाब होंगे। पर ऐसा नहीं हुआ, भारत यह सीरीज 3-1 से हारा। दुखद बात यह थी कि सीरीज के आखिरी तीनों मैच में भारत ने ही बेहद शर्मनाक प्रदर्शन किया।
एंडरसन-जडेजा विवाद
10 जुलाई, 2014. पहले टेस्ट का दूसरा दिन। लंच से पहले रवींद्र जडेजा और जेम्स ऐंडरसन के बीच पहले मैदान पर झड़प हुई. फिर उसके बाद लंच के लिए पवेलियन लौटते वक्त एंडरसन ना सिर्फ जडेजा बल्कि कप्तान महेंद्र सिंह धोनी से भी उलझ पड़े थे। उसके बाद क्या हुआ ये टेस्ट खत्म होने के बाद ही पता चला। आईसीसी आचार संहिता के लेवल तीन के तहत टीम इंडिया ने एंडरसन पर जडेजा के साथ बदतमीजी करने और धक्का मारने का आरोप जड़ा। तो, इंग्लैंड टीम ने भी जडेजा पर खेल भावना से खिलवाड़ का आरोप लगा डाला। आईसीसी ने गॉर्डन लुइस को ज्यूडिशियल कमिश्नर नियुक्त किया। टीम इंडिया के दावों से उलट मामले की सुनवाई कर रही जांच कमिटी ने इंग्लैंड के तेज गेंदबाज जेम्स एंडरसन को बेगुनाह करार दिया।
आईपीएल
सुरेश रैना के शानदार शतक से चेन्नई सुपर किंग्स ने एकतरफा फाइनल में कोलकाता नाइट राइडर्स को हराकर चैंपियंस लीग टी20 क्रिकेट टूर्नामेंट जीत लिया। जीत के लिए 181 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए केकेआर ने रैना के 62 गेंद में 109 रन की मदद से नौ गेंद शेष रहते जीत दर्ज की।
बांग्लादेश दौरा
सुरेश रैना की अगुवाई में जून महीने में भारतीय टीम  3 एकदिवसीय मैचों की सीरीज खेलने बांग्लादेश गई। इस सीरीज पर भारत ने 2-0 से कब्जा जमाया। आखिरी एकदिवसीय बारिश के कारण रद्द कर दिया गया था।
वेस्टइंडीज का भारत दौरा
अक्टूबर महीने में वेस्टइंडीज टीम भारत के दौरे पर आई थी. पर यह दौरा वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड और खिलाड़ियों के बीच भुगतान विवाद के कारण सुर्खियों में रहा। वेस्टइंडीज खिलाड़ियों ने विवाद के कारण भारत के बचे दौरे से हटने का फैसला किया। इस विवाद के कारण वनडे सीरीज का पांचवां वनडे, एक टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच और तीन टेस्ट मैच नहीं हो सके।
श्रीलंका का भारत दौरा
हालांकि इससे पहले वनडे सीरीज में भारत ने 2-1 की बढ़त हासिल कर ली थी। विराट कोहली की कप्तानी ने टीम इंडिया ने श्रीलंका के खिलाफ वनडे सीरीज में इतिहास रच दिया। भारत ने पड़ोसी देश को इस श्रृंखला में 5-0 से हराया।
भारतीय टीम मैनेजमेंट में बदलाव
इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट श्रंखला में करारी हार के बाद जागते हुए भारतीय क्रिकेट बोर्ड(बीसीसीआई) ने वनडे सीरिज के लिए टीम मैनेजमेंट में बदलाव किया। बीसीसीआई ने टीम के गेंदबाजी और फील्डिंग कोच की छुट्टी कर दी गई। बीसीसीआई ने पूर्व ऑलराउंडर संजय बांगर और पूर्व तेज गेंदबाज बी अरुण को असिस्टेंट कोच नियुक्त किया। आर श्रीधर को टीम का नया फील्डिंग कोच बनाया गया। इंग्लैंड दौरे पर टेस्ट सीरीज में बुरी तरह हार के बाद रवि शास्त्री को वनडे सीरीज के लिए भारतीय टीम का डायरेक्टर नियुक्त किया गया। भारत ने वनडे सीरीज जीत ली थी। बीसीसीआई ने शास्त्री को अगले साल होने वाले क्रिकेट विश्व कप के लिए भी ये जिम्मेदारी दी है।
बाएं हाथ के अनुभवी स्पिनर मुरली कार्तिक ने क्रिकेट से संन्यास ले लिया। उन्होंने भारत के लिए 1999 से 2007 के बीच आठ टेस्ट मैच में 24 और 37 वनडे मैच खेलते हुए 37 विकेट लिए।
आईसीसी पुरस्कार
ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज मिशेल जॉनसन को आईसीसी वर्ष का सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर और आईसीसी वर्ष का सर्वश्रेष्ठ टेस्ट क्रिकेटर चुना गया। भारत के भुवनेश्वर कुमार को पीपल्स चॉइस अवॉर्ड मिला। एबी डिविलियर्स को साल का बेस्ट वनडे क्रिकेटर चुना गया। महिलाओं में यह सम्मान इंग्लैंड की सारा टेलर को मिला. इंग्लैंड के गैरी बैलंस इमर्जिंग प्लेयर ऑफ द ईयर बने हैं।


साल 2014 रहा भारत की महिला खिलाड़ियों नाम
साल 2014 भारत की महिला खिलाड़ियों के लिए उपलब्धियों भरा साबित हुआ। इस साल 2 बड़े खेलों राष्ट्रमंडल खेल (ग्लासगो) और एशियाई खेलों (इंचियोन) का आयोजन किया गया जिसमें भारतीय महिला खिलाड़ियों ने सफलता के कई झंडे गाड़े। राष्ट्रमंडल खेलों में महिला खिलाड़ियों ने दमदार प्रदर्शन किया और देश के पुरुष खिलाड़ियों को बराबरी की टक्कर दी। भारत ने यहां कुल 15 स्वर्ण, 30 रजत और 19 कांस्य पदक जीते, जिसमें पुरुष खिलाड़ियों ने 9 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य सहित कुल 35 पदक जीते। वहीं, महिला खिलाड़ियों ने 6 स्वर्ण, 13 रजत और 10 कांस्य सहित कुल 29 पदक जीते। पुरुष और महिला खिलाड़ियों के ओवरऑल प्रदर्शन में सिर्फ 6 पदकों का फासला रहा। वहीं यही एशियाई खेलों में भारत ने 11 स्वर्ण, 10 रजत समेत कुल 57 पदक जीते जिसमें महिला खिलाड़ियों ने 5 स्वर्ण, 4 रजत और 18 कांस्य पदक जीते। सानिया मिर्जा, देश की सबसे सफल महिला टेनिस खिलाड़ी। उनके लिए यह साल थोड़ा विवादों से घिरा रहा लेकिन कोर्ट पर उन्होंने जबर्दस्त कामयाबी हासिल की।

सानिया ने साल के चौथे ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट अमेरिकी ओपन में मिश्रित युगल जीता जो उनके करियर का तीसरा मेजर युगल खिताब है। इससे पहले वह ऑस्ट्रेलियन ओपन (2009) और फ्रेंच ओपन (2012) जीत चुकी हैं।

अमेरिकी ओपन में ब्रूनो सोयर्स के साथ मिश्रित युगल का खिताब जीतने के बाद सानिया ने जिंबाब्वे की कारा ब्लैक के साथ जोड़ी बनाते हुए डब्‍ल्यूटीए टूर फाइनल्स का खिताब भी जीत लिया। डब्‍ल्यूटीए टूर फाइनल्स जीतने वाली वह भारत की पहली महिला खिलाड़ी बनीं। वहीं, उन्होंने एशियाड में पहले खेलने से इनकार करने के बाद खेलने का मन बनाया और मिश्रित युगल में साकेत मायेनी के साथ स्वर्ण पदक जीता और फिर महिला युगल में कांस्य भी हासिल किया।

5 बार की वर्ल्ड चैंपियन महिला मुक्केबाज एमसी मैरीकॉम ने इस साल भी सफलता का परचम लह‌राया। वह दुनिया की एकमात्र ऐसी महिला मुक्केबाज हैं जिन्होंने 6 वर्ल्ड चैंपियनशिप में पदक जीते जिसमें 5 तो खिताब ही शामिल है।
2010 में खेले गए ग्‍ंवाझू एशियाड में कांस्य पदक जीतने वाली मैरीकॉम ने इस बार इंचियोन एशियाई खेलों की फ्लाइवेट वर्ग में गोल्ड हासिल कर देश को पीला तमगा दिलाया। एशियाड में स्वर्ण जीतने वाली वह भारत की पहली महिला मुक्केबाज बनीं।
रिंग के बाहर भी उनके लिए यह साल बेहद शानदार रहा, उनकी जीवन और संघर्षों पर आधारित फिल्म 'मैरीकॉम' रिलीज हुई। इस फिल्म की नायिका प्रियंका चोपड़ा थीं जिन्होंने मैरीकॉम का रोल निभाया। यह फिल्म हिट रही।
देश की सबसे खूबसूरत और बेहतरीन महिला खिलाड़ियों में गिना जाता है दीपिका पल्लीकल को। उन्होंने इस साल देश के लिए कई कामयाबियां हासिल की। ग्लासगो राष्ट्रमंडल में उन्होंने जोशना चिनप्पा के साथ मिलकर स्‍क्वैश्‍ा में महिला युगल का स्वर्ण जीता।
स्‍क्वैश में गोल्डन सफलता के साथ-साथ भारत का राष्ट्रमंडल खेलों में इस स्पर्धा से यह पहला पदक भी है। महिला युगल मुकाबले में भारतीय टीम की जीत इस लिहाज ऐतिहासिक है क्योंकि उसने फाइनल में इंग्लैंड की वर्ल्ड नंबर वन जोड़ी को हराया। पांचवी वरीयता प्राप्त दीपिका और जोशना की जोड़ी ने इंग्लैंड की जोड़ी को बेहद आसान मुकाबले में 11-6, 11-8 से हराकर देश को इस खेल का पहला गोल्ड दिलाया। दिलचस्प यह रहा कि राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में इस स्पर्धा में भारत का अब तक यह‌पहला पदक भी है।

इसके बाद दीपिका ने एशियाई खेलों के भा शानदार प्रदर्शन किया और सेमीफाइनल में पहुंचकर कांस्य पदक जीता। वह दोनों बड़े गेम्स में स्‍क्वैश में पदक जीतने वाली भारत की पहली खिलाड़ी बनी। फरवरी, 2010 में वह दुनिया की शीर्ष 10 खिलाड़ियों की सूची में फिर से शामिल हुईं। शीर्ष 10 के अंदर पहुंचने वाली वह भारत की पहली खिलाड़ी हैं। इसके अलावा उन्हें इस साल देश के चौथे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्मश्री से भी नवाजा गया।
साइना नेहवाल
बैडमिंटन को देश में लोकप्रिय बनाने वाली साइना नेहवाल के लिए यह साल सफलताओं से भरा रहा। पिछले साल वह एक भी खिताब नहीं जीत सकी थी। लेकिन पिछले साल की असफलता को पीछे छोड़ते हुए उन्होंने इस साल 3 बड़े खिताब जीते, जिसमें चाइना ओपन सुपर सीरीज अहम है। साइना ने चाइना ओपन के अलावा इंडियन ओपन ग्रैंड प्रिक्स गोल्ड और ऑस्ट्रेलियन ओपन सुपर सीरीज जीता। इसके अलावा वह उबेर कप में कांस्य पदक जीतने वाली टीम का हिस्सा भी रहीं।
साथ ही वह लंबे समय बाद फिर से रैंकिंग में ऊपर चढ़ रही हैं। वह रैंकिंग में चौथे पायदान पर पहुंच गई हैं। हालां‌कि उनकी सर्वश्रेष्ठ रैंकिंग 2 है जो उन्होंने दो बार 2 दिसंबर 2010 और 20 जुलाई 2013 को हासिल की थी। साइना ने अपने करियर को और बेहतर करने के लिए पुलेला गोपीचंद का साथ छोड़कर विमल कुमार को अपना नया कोच नियुक्त कर लिया। विमल भी देश के जाने-माने बैडमिंटन खिलाड़ी रहे हैं
भारत में साइना नेहवाल के बाद पीवी सिंधू बैडमिंटन में सफल खिलाड़ियों में दूसरा बड़ा नाम है। जो काम साइना नहीं कर सकीं वो सिंधू ने कर दिखाया। पिछले साल की तरह इस बार भी उन्होंने वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता। 2013 में भी इस टूर्नामेंट में कांस्य पदक हासिल किया था। वह वर्ल्ड चैंपियनशिप में दो पदक जीतने वाली भारत की पहली और एकमात्र बैडमिंटन खिलाड़ी हैं।
इसके अलावा 3 अन्य बड़े स्पर्धाओं में भी कांस्य जीता। उबेर कप में भारत की महिला टीम ने कांस्य पदक जीता जिसमें सिंधू शामिल थी। साथ ही इसी साल इंचियोन में हुए एशियाई खेलों में उन्होंने टीम स्पर्धा में कांस्य पदक देश को दिलाया।
ग्लासगो में खेले गए राष्ट्रमंडल खेलों में भी सिंधू ने महिलाओं की एकल स्पर्धा में कांस्य पदक जीता। उनकी सफलता के शानदार ट्रैक पर एक यही कमी है कि हर बार उनके खाते में कांस्य पदक ही आया है। साल के अंत में सिंधू ने मकाऊ ओपन में खिताबी जीत हासिल की। उन्‍होंने लगातार दूसरी बार मकाऊ ओपन जीता है। हैदराबाद की 19 साल की इस बेहतरीन खिलाड़ी को एनडीटीवी ने स्पोटर्स पसर्न ऑफ द इयर के खिताब से भी नवाजा है।।
एल सरिता देवी
महिला मुक्केबाल एल सरिता देवी के खाते में भले ही कई बड़े खिताब न हों लेकिन उन्होंने इस साल दक्षिण कोरिया के इंचियोन में खेले गए एशियाई खेलों में जो साहस दिखाया उसके लिए उन्हें लंबे समय तक याद किया जाएगा।
लाइटवेट भार वर्ग में सेमीफाइनल मुकाबले में उन्हें मेजबान कोरियाई प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ हारा हुआ घो‌षित कर दिया गया तो वह इस फैसले से चौंक गई और रोने लगीं। भारतीय टीम ने इस फैसले के खिलाफ अपील भी की लेकिन एआईबीए की तकनीकी टीम ने इसे रद्द कर दिया। बाद में उन्होंने विरोधस्वरूप पदक पहनने से इनकार कर दिया। उन्होंने वह पदक रजत पदक विजेता जिससे हारी थी उसे सौंप दिया। उनके इनकार के बाद मामला और गरमा गया।

हालांकि बाद में भारी दबाव के बीच उन्होंने माफी मांगते हुए पदक को स्वीकार कर लिया। वहीं एआईबीए ने उन पर अस्थाई प्रतिबंध लगा रखा है। उनको प्रतिबंधित किए जाने का भारतीय खेल मंत्री के अलावा सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली जैसे लोग भी विरोध कर चुके हैं।
कबड्डी
अंतरराष्ट्रीय कबड्डी में भारत का दमखम अभी भी बना हुआ है। एशियाई खेलों में जब से कबड्डी को शामिल किया गया है तब से भारत ने गोल्ड ही गोल्ड जीते हैं।
कबड्डी में पुरुष वर्ग को 1990 से ही शामिल किया गया और भारतीय टीम तब से चैंपियन हैं। जहां तक महिला कबड्डी का सवाल है तो उसे 2010 में पहली बार एशियाई खेलों का हिस्सा बनाया गया।
ग्वांझू (चीन) के बाद 2014 में इंचियोन एशियाड भी भारत की महिला टीम ने देश को पीला तमगा दिलाया। फाइनल में उसने इरान को 30-21 से हराया।
'मिलेनियम चाइल्ड' सीमा अंतिल
हरियाणा के सोनिपत में जन्मी और 'मिलेनियम चाइल्ड' कही जाने वाली सीमा अंतिल ने कम उम्र से ही देश के लिए पदक जीतने का काम शुरू कर दिया था। 17 साल की उम्र में उन्होंने 2000 में जूनियर चैंपियनशिप में देश को स्वर्ण पदक दिलाया था। बाद में डोपिंग में फंसी लेकिन अब वह उस बुरे दौर से बाहर निकल चुकी हैं और उन्होंने साल 2014 में देश के लिए स्वर्णिम प्रदर्शन भी किया है।
सीमा अंतिल अब सीमा अंतिल पुनिया हो गई हैं क्योंकि उनकी शादी उत्तर प्रदेश के मेरठ में हुई है। सीमा के लिए भी यह साल बेहद शानदार रहा। उन्होंने डिस्कस थ्रो में ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में देश के लिए रजत पदक जीता। इसके बाद उन्होंने अपने प्रदर्शन में और सुधार करते हुए इंचियोन एशियाड इसी स्पर्धा में स्वर्ण पदक पर कब्जा जमा लिया।
एथलेटिक्स में दोनों स्वर्ण महिलाओं ने दिलाए। सीमा के अलावा महिलाओं की चार गुना चार सौ मीटर रेस में प्रियंका पवार, टिंटू लुका, मंदीप कौर और पूवम्‍मा माचेटीरा ने शानदार खेल दिखाते हुए देश को पीला तमगा दिलाया।
भारतीय महिला निशानेबाज
भारतीय निशानेबाजों ने 2014 के राष्ट्रमंडल खेलों में शानदार प्रदर्शन किया। महिलाओं ने भी देश को कई पदक दिलाए। निशानेबाज अपूर्वी चंदीला ने महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में जोरदार मुकाबले में स्वर्ण पदक जीता। उनकी यह जीत इस लिहाज से बेहद खास रही क्योंकि उनका यह पहला अंतरराष्ट्रीय पदक भी है।
17वें नंबर की निशानेबाज ने वर्ल्ड नंबर 8 की खिलाड़ी को हराया। क्वालीफिकेशन राउंड में अपूर्वा ने गेम्स रिकॉर्ड के साथ फाइनल में जगह बनाई थी। उनके अलावा राही सरनोबत ने 25 मीटर पीस्टल शूटिंग में देश को पीला तमगा दिलाया। 23 साल की यह निशानेबाज सेमीफाइनल में 16 अंकों के बड़े अंतर के साथ फाइनल में पहुंची थी। हालांकि उनका यह प्रदर्शन एशियाई खेलों में नहीं दिखा और एक भी पदक नहीं जीत सकी।
दीपा कर्माकर
दीपा कर्माकर जिम्नास्टिक में तेजी से उभरता नाम है। उन्होंने इस साल ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में जबर्दस्त खेल दिखाया और भारत को महिला वर्ग में पहली बार इस खेल से कोई पदक दिलाया।
दीपा ने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया और इस खेल में भारत का लगातार दूसरी बार खाता जारी रखा। पिछली बार आशीष ने भारत का खाता खोला था तो इस बाद दीपा ने। त्रिपुरा की दीपा ने राष्ट्रमंडल खेलों में महिलाओं की वोल्ट स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया। दीपा को राष्ट्रमंडल में पदक जीतने वाली देश की पहली भारतीय महिला जिम्नास्ट बनने का गौरव हासिल हुआ।  20 वर्षीय दीपा महिलाओं की व्यक्तिगत वॉल्ट स्पर्धा में 14.366 के स्कोर के साथ तीसरे स्‍थान पर रहकर देश का इस खेल में पदकों का खाता खोला। हालांकि उन्होंने टीम स्पर्धा में भी शानदार प्रदर्शन किया लेकिन भारतीय टीम पदक से चूक गईं।
कुश्ती
कुश्ती में भारत के लिए यह साल अच्छा रहा खासकर महिला पहलवानों की लिहाज से। राष्ट्रमंडल खेलों में महिला पहलवानों ने 2 गोल्ड के अलावा 3 सिल्वर और एक कांस्य पदक जीता। जबकि एशियाई खेलों में महिला पहलवानों ने 2 कांस्य पदक जीते।

48 किग्रा फ्रीस्टाइल भार वर्ग में वीनेश फोगाट ने राष्ट्रमंडल में स्वर्ण पदक जीता वहीं एशियाई खेलों में वह देश को कांस्य पदक ही दिला सकी। वीनेश के बाद गीतिका जाखड़ (63 क्रिग्रा) ही ऐसी दूसरी भारतीय महिला पहलवान हैं जिन्होंने इस साल हुए दोनों बड़े खेल आयोजनों में पदक जीते हैं। राष्ट्रमंडल में गीतिका ने रजत तो एशियाई खेलों में कांस्य पदक हासिल किया। बबीता कुमारी ने 55 किग्रा वर्ग में राष्ट्रमंडल खेलों में गोल्ड जीता
विश्व क्रिकेट के लिये दुःख दायी रहा वर्ष 2014, ह्यूज की मौत से सदमें में रहा क्रिकेट जगत

विश्व क्रिकेट के लिये वर्ष 2014 कुछ दुखदायी रहा। ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाज फिलिप ह्यूज की मौत के दुख का सामना करना पड़ा जो घरेलू क्रिकेट मैच के दौरान बाउंसर लगने से चोटिल हो गये और बाद में अस्पताल में उनकी मौत हो गयी। दक्षिण अफ्रीका के महान ऑलराउंडर जैकस कालिस ने अंतरराष्ट्रीय क्रिेकेट से सभी फॉर्मेट से संन्यास लिया। वैसे उन्होंने टेस्ट क्रिकेट से रिटायरमेंट 2013 में ही ले लिया था। एकदिवसीय में 328 मैचों में दक्षिण अफ्रीका का प्रतिनिधित्व करते हुए कालिस ने 11579 रन बनाए. उन्होंने 17 शतक और 86 अर्धशतक भी जड़े।

करीब 18 साल तक अपने देश का प्रतिनिधित्व करने के बाद श्रीलंकाई बल्लेबाज महेला जयवर्धने ने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले लिया। उन्होंने श्रीलंका के लिए 149 मैच खेले जिसमें 49.84 की औसत से 11814 रन बनाए। इसमें 34 शतक और 50 अर्धशतक भी शामिल हैं।दक्षिण अफ्रीकी क्रिकेट टीम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाले कप्तान ग्रीम स्मिथ ने अतंरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपना आखिरी टेस्ट मैच खेला. उन्होंने दक्षिण अफ्रीका का प्रतिनिधित्व 117 मैचों में किया। टेस्ट की 205 पारियों में उन्होंने 59.67 की औसत से 9265 रन बनाए. इसमें 27 शतक और 38 अर्धशतक शामिल हैं।
इंग्लैंड बल्लेबाज केविन पीटरसन का क्रिकेट करियर इसी साल फरवरी में खत्म हो गया। ऑस्ट्रेलिया के हाथों एशेज में इंग्लैंड की 0-5 से हार के बाद इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड ने उनका अनुबंध खत्म कर दिया। इस साल के अंत में पीटरसन ने अपनी आत्मकथा रिलीज की। अपनी किताब में पीटरसन ने पूर्व कोच फ्लावर और कुछ सीनियर खिलाड़ियों पर ड्रेसिंग रूम में 'बुलीइंग कल्चर' को हवा देने का आरोप लगाया। उन्होंने साथी खिलाड़ी मैट प्रायर को ड्रेसिंग रूम का 'माहौल खराब करने वाला' और पूर्व कोच एंडी फ्लावर को 'डर-डरकर फैसले लेने वाला' बताया।
ऑस्ट्रेलिया ने जनवरी महीने में इंग्लैंड को सिडनी में खेले पांचवें और अंतिम टेस्ट में 281 रन की करारी शिकस्त देकर मेहमान टीम पर एशेज क्रिकेट सीरीज में 5-0 से क्लीन स्वीप किया। इंग्लैंड एवं वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) ने ऑस्ट्रेलिया के हाथों एशेज में मिली करारी हार के बाद टीम के मुख्य कोच एंडी फ्लावर से उनके पद से हटा दिया।

संदिग्ध गेंदबाजी एक्शन के लिए अजमल पर लगा प्रतिबंध, सुनील नरेन की शिकायत
पाकिस्तान के ऑफ स्पिन गेंदबाज सईद अजमल के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में गेंदबाजी करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया। दरअसल, उनके गेंदबाजी एक्शन को जांच में अवैध पाया गया। आईसीसी द्वारा जारी विज्ञप्ति में बताया गया कि जांच में सभी गेंदों में उनकी कोहनी तय मानक 15 डिग्री से अधिक घूम रही थी।
जादुई स्पिनर सुनील नरेन को चैंपियंस लीग टी-20 के फाइनल में गेंदबाजी से बैन करने के बाद वेस्टइंडीज ने उनका नाम भारत दौरे से वापस ले लिया है। चैंपियंस लीग के आयोजकों ने इस 26 वर्षीय ऑफ ब्रेक गेंदबाज के संदिग्ध गेंदबाजी ऐक्शन के लिए दो बार रिपोर्ट की थी।

श्रीलंका ने जीता एशिया कप
श्रीलंका ने पाकिस्तान को हराकर एशिया कप क्रिकेट टूर्नामेंट जीत लिया। बांग्लादेश के मीरपुर में पाकिस्तान ने श्रीलंका के सामने जीत के लिए 261 रनों का लक्ष्य रखा था जिसे उसने 47वें ओवर में पांच विकेट के नुकसान पर हासिल कर लिया।

श्रीलंका बना वर्ल्ड टी20 चैंपियन
2014 वर्ल्ड टी-20 फाइनल में श्रीलंका ने भारत को 6 विकेट से हराकर खेल के इस सुपरफास्ट फॉर्मेट का विश्वचैंपियन बन गया। जीत के लिए 131 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए श्रीलंका ने 13 गेंद शेष रहते ये जीत हासिल की।

अन्य समाचार

अपनी धीमी बल्लेबाजी के कारण आलोचकों के निशाने पर रहे पाकिस्तान के कप्तान मिसबाह उल हक ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ केवल 56 गेंद पर शतक ठोककर टेस्ट क्रिकेट में सबसे तेज शतक के विव रिचर्ड्स के रिकॉर्ड की बराबरी की। न्यूजीलैंड के हरफनमौला खिलाड़ी कोरी एंडरसन ने वेस्टइंडीज के खिलाफ 36 गेंदों में शतक जमाकर नया विश्व रिकॉर्ड बनाया। एंडरसन ने अपनी पारी की 36वीं गेंद पर 12वां छक्का जमाकर पाकिस्तानी बल्लेबाज शाहिद अफरीदी का 18 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया। अफरीदी ने 1996 में श्रीलंका के खिलाफ 37 गेंदों में शतक जमाया था।






Wednesday, April 10, 2013

क्रिकेट का एक ही “वाल” राहुल द्रविड


भारतीय क्रिकेट के महानतम बल्लेबाजों में शुमार तथा द वाल”  के नाम से मशहूर राहुल द्रविड़ ने अपने कॅरियर में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं पर कभी भी उन्होंने मीडिया में खुलेआम अपने गुस्सा नहीं दिखाया इसकी बजाय उन्होंने अपने प्रदर्शन से अपनी काबिलियत साबित की है।
वर्तमान परिदृश्य में राहुल अपनी योग्यता के बल पर अपने समकालिन क्रिकेटरों से कहीं ज्यादा आगे हैं। इसका ताजा उदाहरण आईपीएल-6 है, जहां सचिन, रिकी पोटिंग, माहेला जयवर्धने, जैक्स कैलिस जैसे खिलाडी खेल रहे हैं, लेकिन राहुल न सिर्फ इन खिलाडियों से ज्यादा अच्छा खेल दिखा रहे हैं, बल्कि अपनी टीम राजस्थान रायल के कोच की भी भूमिका निभा रहें हैं।

यहां तक की एक मैच में तो राहुल ने मैन आफ दी मैच का पुरस्कार भी जीता। राहुल पहले मैच में  दिल्ली डेयरडेविल्स के खिलाफ तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे और 51 गेंदों पर 65 रनों की आतिशी पारी खेलकर साबित कर दिया कि अच्छी तकनीक फटाफट क्रिकेट में भी काम आती है। द्रविड की गिनती चौके-छक्के लगाने वाले खिलाड़ियों में नहीं होती, उम्र भी उनकी 40 साल से ज्यादा हो चुकी है, लेकिन उनकी बल्लेबाजी को देखकर एक बार भी ऐसा नहीं लगा कि वे ट्वेंटी-20 क्रिकेट में मिसफिट हैं।

अपने एक दिवसीय करियर के शुरूआत में संघर्ष करने के बाद द्रविड़ ने लगन और मेहनत से खुद को बेहतर बनाया है। बहुत कम लोगों को यह याद होगा कि एकदिवसीय में द्रविड़ 22 गेंदों में 50 रन बनाने का करिश्मा दिखा चुके हैं। यह स्कोर उन्होंने न्यूजीलैंड के खिलाफ 2003 में बनाया था। यहीं नहीं द्रविड़ ने टी20 इंटरनेशनल में 2011 में डेब्यू मैच में ही एक के बाद एक तीन छक्के लगाए थे।

आईपीएल में द्रविड़ का योगदान देखें तो एक पारी बेहद सराहनीय है। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलूरू के खिलाफ आईपीएल के पहले ही सीजन में द्रविड़ ने 36 गेंदों में छह छक्कों की मदद से 75 रन बनाए थे। हाल ही दिल्ली डेयरडेविल्स के खिलाफ हुए मैच में क्लासी द्रविड़ देखने को मिले।

जब उन्होंने पहली बॉल पर चौका लगाया तो सबको समझ आ गया कि आज द्रविड़ कुछ अलग करेंगे। वही हुआ, अगले कुछ शॉर्ट में द्रविड़ ने अपनी टेक्निकल ब्रिलिएंस का प्रदर्शन किया। जैसे जैसे खेल आगे बढ़ा द्रविड़ को फ्रंट-लेग टाइम क्लियर कर अपने लिए रूम बनाते देख गया।
आईपीएल में द्रविड़ की स्ट्राइक रेट 117.24 है, यह किसी भी बल्लेबाज के लिए टी20 में हाइएस्ट स्ट्राइक रेट 120 से थोड़ा ही कम है। इसके अलावा आईपीएल 6 के पहले मैच के दौरान उन्हें मैदान पर काफी मुस्कुराते हुए देखा गया।

 वह बेहद संजीदा और गंभीर खिलाड़ी हैं और टीम इंडिया में खेलते वक्त भी उन्हें बहुत कम ही मैदान पर हंसते हुए देखा जाता था। पर यहां उनकी मुस्कान यह संकेत दे रही थी कि वे टी20 फॉर्मेट में कम प्रेशर महसूस करते हैं।

सचिन, सौरभ और लक्ष्मण के साथ खेलते हुए राहुल ने अपनी एक अलग ही जगह बनाई है। कई लोग उन्हें एक शांत बल्लेबाज मानते हैं। शुरू में उनकी धीमी बल्लेबाजी की वजह से उन्हें एकदिवसीय मैचों में अधिक मौके नहीं दिए गए पर राहुल द्रविड़ ने एकदिवसीय मैचों में भी ऐसी छाप छोड़ी की दुनिया उनकी कद्रदान हो गई।

साल 1999 और 2003 के विश्व कप में राहुल द्रविड़ ने जो भूमिका निभाई उससे साफ हो गया कि इस दीवार में बहुत जान है। द्रविड़ ने अब तक 153 टेस्ट मैचों की 265 पारियों में 52.40 की औसत से 12314 रन बनाए हैं. इस दौरान उन्होंने 60 अर्धशतक और 32 शतक जमाए हैं।

टेस्ट के विपरीत उन्होंने वनडे में धीमे अंदाज में बल्लेबाजी की है पर वनडे में भी राहुल द्रविड़ का सफर शानदार रहा है। 39.43 की औसत से राहुल द्रविड़ ने 339 मैचों में 10,000 रन बनाए हैं। विश्व क्रिकेट में दस हजार का आकंडा पार करने वाले वह दुनियां के छठे बल्लेबाज हैं। टेस्ट मैचों में 200 से अधिक कैच लेकर वह दुनियां के सबसे अधिक कैच लेने वाले खिलाड़ी भी हैं।

राहुल द्रविड़ ने हमेशा मुसीबत के समय टीम की हर तरह से मदद की है। जब टीम को एक विकेट कीपर की जरुरत थी तो राहुल द्रविड़ ने यह भूमिका भी निभाई. जब जरुरत एक कप्तान की थी तब उन्होंने कप्तानी संभाली।

राहुल द्रविड़ को मिले पुरस्कार और रिकॉर्ड

अर्जुन अवार्ड : 1998 में राहुल द्रविड़ को अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया गया था.

2000: विजडन क़्रिकेटर ऑफ द ईयर (Wisden Cricketer of the Year 2000)

पद्म श्री : 2004 में राहुल को पद्म श्री से सम्मानित किया गया था.

आईसीसी प्लेयर ऑफ द ईयर : 2004 में ही राहुल द्रविड़ को आईसीसी प्लेयर ऑफ द ईयर के खिताब से नवाजा गया था.
पद्मभूषण  :   खेल में अहम योगदान के लिए राहुल द्रविड़ को 2013 में पद्मभूषण सम्मान दिया गया है. टीम इंडिया की दीवार माने जानेवाले राहुल द्रविड़ ने क्रिकेट में अपना अहम योगदान दिया है.
सर्वाधिक कैच : टेस्ट इतिहास में राहुल द्रविड़ सबसे अधिक कैच लेने वाले खिलाड़ी हैं जिनके नाम 200 कैच हैं.

12,000 टेस्ट रन : राहुल द्रविड़ दुनियां के तीसरे और भारत के दूसरे ऐसे बल्लेबाज हैं जिनके नाम 12,000 टेस्ट रन हैं.

10,000 वनडे रन : राहुल द्रविड़ भारत के तीसरे ऐसे बल्लेबाज हैं जिनके नाम 10,000 से ज्यादा वनडे रन हैं.

85 शतकीय भागीदारी : राहुल द्रविड़ ने अपने अन्य साथी क्रिकेटरों के साथ 85 से अधिक शतकीय भागीदारियां निभाई हैं जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है.

300 रन से ज्यादा की भागीदारी : राहुल द्रविड़ वनडे के ऐसे इकलौते खिलाड़ी हैं जिन्होंने एक पारी में 300 से ज्यादा रनों की भागीदारी में हिस्सा लिया है.
सुनील

Tuesday, April 9, 2013

इरादों में हो मजबूती तो कोई मंजिल नहीं मुश्किल


इंसान में जज्बा और जुनून हो तो वह कमियों के बावजूद अपनी मंजिल को पा ही लेता है फिर चाहे शरीर साथ दे या ना दे। ऐसे में व्यक्ति अपने हौसलों को ही अपने पंख के तौर पर इस्तेमाल कर अपनी उड़ान को पूरा करने की क्षमता रखता है। बात जब खेल की हो तो बात ही कुछ और है।

खेल चाहे जो भी हो पर एक बात तो साफ है कि पैसे और शोहरत की कमी इसमें नहीं है। तभी तो बहुतेरे लोग इसे अपना प्रोफेशन बनाने में लगे हैं। इसमें शारीरिक सक्षम लोगों को तो लम्बी फौज है, पर एक वर्ग ऐसा भी है जो खेल को केवल जुनून और जीवन की कठिनाईयों से न हारने की जिद के आधार पर इसे अपना रहा है। इस वर्ग का विशेषण यह है कि शरीर के साथ नहीं देने के बावजूद उनका जज्बा ही उन्हें लगातार आगे बढ़ने का हौसला देते हैं। इन्हीं हौसलों के जरिए ही आज दुनिया भर में कई ऐसे खेल अस्तीत्व में आ गये हैं जिनकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। और बात जब महिलाओं की हो तो वह अपने-आप में ही खास हो जाता है।

"कमल है कमजोर नहीं, शक्ति का नाम नारी है"- इस पंक्ति को चरितार्थ किया है मूल रुप से मेरठ की रहने वाली व बीएचयू के दृश्य संकाय कला की छात्रा सुहानी विथिका ने। सुहानी ने दिखा दिखा दिया कि अगर हौसला हो तो इंसान अपनी पहुँच से ऊपर तक मेहनत कर जो सपने देखे हैं, वास्तविकता में उसे परिणीत भी कर लेते हैं।

कहते हैं कि इंसान यदि ठान ले तो वह कुछ भी कर सकता है, यहां तक कि असंभव को भी संभव कर सकता है। यही बात सुहानी पर भी लागू होती है। मूक बधिर सुहानी की ढेरों उपलब्धियां उसकी जन्मजात कमी को कहीं पीछे छोड चुकी है। हालांकि सुहानी की राष्ट्रीय स्तर पर पाई गई उपलब्धियों का रास्ता उन कांटों भरे रास्तों से गुजरी है जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है। बहरहाल उत्तरप्रदेश की इस होनहार वीरवान खिलाडी की नजर बुल्गारिया मे होने वाली डीफ ओलंपिक के बैडमिंटन प्रतियोगिता में लगी है। जिसकी तैयारी में वह जुट चुकी है।

अपने दृढ़ निश्चय के बल पर शारीरिक अक्षमता को मात देते हुए सुहानी ने अपनी अलग पहचान बना ली है। सुहानी विथिका ने औरंगाबाद में 1 अप्रैल से 5 अप्रैल तक चले नेशनल गेम्स आफ डिफ-2013 के बैडमिंटन प्रतियोगिता में अपने बढि़या खेल से न सिर्फ बनारस बल्कि अपने माता-पिता का भी सम्मान बढाया है।

विथिका ने अपनी मां की मदद से बताया कि उसने बैडमिंटन एकल प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक हासिल किया, जबकि मिश्रित युगल प्रतियोगिता में सुहानी व उसकी जोडीदार ने स्वर्ण पदक प्राप्त किया।

सुहानी की सफलता से खुश सुहानी की मां रश्मि लाल ने बताया कि अपने बच्ची की ऐसी हालत पर थोडी परेशानी तो जरूर हुई लेकिन उन्होंने अपने बच्ची को इस कमी से लडने का जज्बा दिया। जब सुहानी डेढ साल की हुई तब उन्हें पता चला की वो सुन नहीं सकती और जब 5 साल की हुई तो उसके न बोल पाने के बारे में जानकर एक बार तो ऐसा लगा जैसे उनकी जिन्दगी ही खत्म हो गयी, लेकिन उस समय सुहानी के पिता कर्नल श्यामलाल ने हार नहीं मानी और सुहानी का इलाज कराया हालांकि इलाज के बाद सुहानी ने सुनना तो शुरु कर दिया लेकिन वह बोल नहीं पायी।

उन्होंने बताया की सुहानी ने भी कभी हार नहीं मानी और अपनी कमजोरी को अपनी ताकत बना ली। अच्छी बैडमिंडन खिलाडी होने के अलावा सुहानी आज लगभग हर खेल में माहिर है। यही नहीं वह एक अच्छी चित्रकार भी है। शटलर होने के अलावा सुहानी स्विमिंग पुल में भी किसी से पीछे नहीं है।

दूसरी तरफ बीएचयू में प्रो. आरएन मिश्रा ने बताया कि सुहानी के बढि़या प्रदर्शन से औरों को भी प्रेरणा मिल रही है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय स्तर पर सुहानी को हर सम्भव मदद की जायेगी।
सुनील दूबे