Thursday, April 2, 2015


ब्रह्मांड में भी गूंजेगा ग्रैंड मास्टर विश्वनाथन आनंद का नाम

विश्व शतरंज में अपने नाम का सिक्का चलाने वाले ग्रैंड मास्टर विश्वनाथन आनंद का नाम अब ब्रह्मांड में गूंजेगा। 1988 में दुनिया के सामने आए एक सुक्ष्म ग्रह का नाम विश्वनाथन आनंद के नाम पर विशी आनंद रखा गया है।

मंगल और बृह्स्पति के बीच आने वाले इस सुक्ष्म ग्रह को अभी तर किसी नाम से नहीं जाना जाता था, लेकिन अब ये ग्रह (4538) विशी आनंद के नाम से जाना जाएगा।

सुक्ष्म ग्रह कमीटी के अध्यक्ष माइकल रुडेनको खुद चेस के बड़े शौकिनों में से एक हैं और जब उन्हें ये काम दिया गया तो उन्होंने सीधे विश्वनाथन आनंद को याद किया और उनके नाम विशी पर इस ग्रह को नया नाम दे दिया (4538) विशी आनंद। इस ग्रह को टोयटा के केन्जो सुजुकी ने खोजा था लेकिन अब तक इसे कोई नाम नहीं दिया गया था। इससे पहले दो चेस प्लेयर के नाम पर ग्रहों का नाम रखा जा चुका है। बड़े खिलाड़ियों में क्रिकट के दिग्गज सर डॉन ब्रैडमेन, टेनिस स्टार रोजर फेडरर और राफेल नडाल के नाम पर भी ग्रहों के नाम रखे जा चुके हैं।



ब्रेंडन मैकुलम सर रिचर्ड हैडली पदक से सम्मानित


न्यूजीलैंड के कप्तान और स्टार क्रिकेटर ब्रेंडन मैकुलम को देश का सर्वोच्च क्रिकेट सम्मान सर रिचर्ड हैडली पदक दिया गया है। मैकुलम ने केन विलियमसन और ट्रेंट बोल्ट को पछाडकर यह पदक जीता। 33 वर्षीय मैकुलम न्यूजीलैंड को पहली बार विश्व कप फाइनल तक ले गये जहां उसे ऑस्ट्रेलिया ने सात विकेट से हराया।

 नौ मैचों में 188.50 के स्ट्राइक रेट से 328 रन बनाने वाले मैकुलम को आईसीसी टूर्नामेंट की टीम का कप्तान भी चुना गया। वहीं, विलियमसन को प्रथम श्रेणी बल्लेबाजी के लिए रेडपाथ कप और बोल्ट को गेंदबाजी के लिए विंसर कप दिया गया।  विलियमसन को 2014 - 15 में वर्ष का सर्वश्रेष्ठ टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर, वनडे क्रिकेटर और टेस्ट क्रिकेट चुना गया था। आठ अप्रैल से कई कीवी खिलाड़ी आईपीएल में अलग- अलग टीमों के लिए खेलेंगे। मैकुलम चेन्नई सुपर किंग्स टीम के सदस्य होंगे।


Tuesday, March 31, 2015

विश्वकप 2015 कई खिलाड़ियों के संन्यास के लिए भी किया जायेगा याद


विश्व कप 2015 का सफल समापन हो गया। ऑस्‍ट्रेलियाई टीम एक बार फिर से अपनी बादशाहत कायम रखने में कामयाब रही। ऑस्‍ट्रेलिया ने 29 मार्च को मेलबर्न के एतिहासिक मैदान में खेले गये खिताबी भिड़ंत में न्‍यूजीलैंड की टीम को रौंदकर ट्रॉफी पर कब्‍जा जमाया।
न्‍यूजीलैंड की टीम पहली बार विश्व कप के फाइनल मुकाबला में पहुंची थी। सात बार सेमीफाइनल का मुकाबला खेल चुकी न्‍यूजीलैंड की टीम ने इतिहास रचते हुए पहली बार फाइनल में जगह बनायी, लेकिन फाइनल में ऑस्‍ट्रेलिया की टीम ने जिस तरह से सभी विभागों में पटकनी दी ऐसा कतई नहीं लगा की न्‍यूजीलैंड की टीम अपने पूल में सबसे बेहतरीन टीम बन कर फाइनल में जगह बनायी। बहरहाल ऑस्‍ट्रेलिया एक बार फिर से आईसीसी विश्व कप में अपनी बादशाहत कायम कर ली है।

इस विश्व कप में सभी 14 टीमों ने शानदार प्रदर्शन किया। टीम इंडिया को विश्व कप का प्रबल दावेदार माना जा रहा था, लेकिन कंगारूओं से आखिरकार पार नहीं पा सका और सेमीफाइनल में ही हार कर स्‍वदेश वापस हो गयी। विश्व कप 2015 को कई मायनों में याद किया जाएगा। इस विश्व कप को कई महान खिलाडियों के विदाई के रूप में याद किया जाएगा।

कुछ खिलाडियों ने पहले से ही वनडे से संन्‍यास की घोषणा कर दी थी, कई खिलाडियों ने अपनी टीम के खराब प्रदर्शन और विश्व कप से बाहर होने के कारण संन्‍यास ले लिया। वनडे से संन्‍यास लेने वाले महान खिलाडियों में ऑस्‍ट्रेलिया के कप्‍तान माइकल क्‍लार्क, श्रीलंका के कुमार संगकारा और महेला जयवर्धने, पाकिस्‍तान टीम से बूम-बूम शाहीद अफरीदी, यूनिस खान और कप्‍तान मिसबाह उल हक।

आइये एक-एक कर इन खिलाडियों के कैरियर पर नजर डालें

* माइकल क्‍लार्क - माइकल क्‍लार्क ऑस्‍ट्रेलिया के बेहतरीन कप्‍तानों के रूप में जानें जाएंगे। क्‍लार्क ने मौजूदा विश्व कप में अपनी टीम को विश्व विजेता बनाया है। क्लार्क इसके साथ ही एलेन बार्डर (1987), स्टीव वा (1999) और रिकी पोंटिंग (2003 और 2007) के साथ ऑस्ट्रेलिया के लिये विश्व कप जीतने वाले चौथे कप्तान हो गए। 34वां जन्मदिन मनाने जा रहे क्लार्क ने 245 वनडे में 7981 रन बनाये जिसमें आठ शतक और 58 अर्धशतक शामिल हैं। वह ऑस्ट्रेलिया के लिये टेस्ट क्रिकेट खेलते रहेंगे।





* कुमार संगकारा - मौजूदा विश्व कप में श्रीलंकाई टीम भले ही क्‍वार्टर फाइनल में ही बाहर हो गयी, लेकिन श्रीलंकाई टीम के पूर्व कप्‍तान और महान खिलाड़ी कुमार संगकारा के लिए विश्व कप 2015 बहुत खास रहा है। संगकारा ने इस विश्व कप में कई रिकार्ड अपने नाम किये। संगकारा विश्व के एक मात्र खिलाड़ी बन गये हैं जिन्‍होंने विश्व कप में लगातार चार शतक जमाया।
संगकारा किसी एक विश्व कप में चार शतक लगाने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज भी बन गये हैं। उन्होंने मार्क वॉ ( 1996 ), सौरव गांगुली ( 2003 ) और मैथ्यू हेडन ( 2007 ) के रिकार्ड को तोड़ा जिन्होंने इससे पहले एक टूर्नामेंट में तीन - तीन शतक लगाये थे। यही नहीं यह पहला अवसर है जबकि किसी एकदिवसीय श्रृंखला या टूर्नामेंट में कोई बल्लेबाज चार शतक लगाने में सफल रहा। इससे पहले 17 अवसरों पर किसी एक टूर्नामेंट में या श्रृंखला में एक बल्लेबाज ने तीन - तीन शतक लगाये थे। अपनी इस पारी के दौरान संगकारा ने ऑस्ट्रेलियाई सरजमीं पर 2000 वनडे रन भी पूरे किये। वह डेसमंड हेन्स ( 3067 ) और विव रिचर्ड्स ( 2769 ) के बाद यह उपलब्धि हासिल करने वाले तीसरे गैर ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज हैं। संगकारा ने आस्ट्रेलियाई धरती पर अब तक 2038 रन बना लिये हैं। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में अपना पांचवां शतक लगाया जो कि श्रीलंका की तरफ से नया रिकार्ड है।

* महेला जयवर्धने - श्रीलंका के दायें हाथ के बल्‍लेबाज महेला जयवर्धने ने अपनी टीम के लिए कई रिकार्ड पारियां खेली हैं। जयवर्धने ने श्रीलंका की ओर से 448 वनडे मैच खेले और 12,650 रन बनाये। 33।37 के औसत से रन बनाने वाले जयवर्धने ने वनडे कैरियर में 19 शतक और 77 अर्धशतक जमाये। उन्‍होंने मौजूदा विश्व कप में श्रीलंकाई टीम के बाहर होने के साथ ही वनडे से संन्‍यास ले लिया। हालांकि जयवर्धने विश्व कप से पहले ही संन्‍यास की घोषणा कर दी थी।






* शाहीद अफरीदी - पाकिस्‍तान टीम के ऑलराउंडर खिलाड़ी शाहीद अफरीदी ने भी विश्व कप में टीम के बाहर होने के साथ ही वनडे से संन्‍यास की घोषणा कर दी। अफरीदी ने कई रिकार्ड अपने नाम किये। कई सालों तक उनके नाम सबसे कम बॉल पर शतक बनाने का रिकार्ड था। अफरीदी ने 37 गेंदों में शतक बनाया था। अफरीदी का रिकार्ड न्‍यूजीलैंड के बल्‍लेबाज कोरी एंडरसन ने 36 गेंदों में शतक जामाकर तोड़ा था। हालांकि एंडरसन का यह रिकार्ड भी ज्‍यादे दिनों तक नहीं रह सका। एंडरसन के रिकार्ड को दक्षिण अफ्रीका के कप्‍तान एबी डिविलियर्स ने मात्र 31 गेंदों में शतक जमाकर तोड़ा।
अफरीदी ने 395 वनडे मैच खेल और 8,019 रन बनाये। जिसमें उनके 6 शतक और 39 अर्धशतक शामिल हैं। अफरीदी ने न केवल अपने बल्‍ले से कमाल दिखाया बल्कि अपनी फिरकी गेंद से भी कई महान बल्‍लेबाजों को नचाया भी। अफरीदी ने 395 वनडे में 395 विकेट झटके।


* यूनिस खान - पाकिस्‍तानी टीम के मध्‍यमक्रम के रीढ़ माने जाने वाले यूनिस खान ने भी मौजूदा विश्व कप में टीम के बाहर होने के साथ ही वनडे क्रिकेट को सदा के लिए अलविदा कह दिया। यूनिस ने पाकिस्‍तान की और 258 वनडे मैच खेले। जिसमें उन्‍होंने 7,165 रन, 7 शतक और 48 अर्धशतक जमाये। यूनिस ने कैरिसर में तीन विकेट भी झटके।






* डेनियल विटोरी -विश्व कप फ़ाइनल में ऑस्ट्रेलिया के हाथों हार के बाद न्यूज़ीलैंड की टीम अपने देश पहुंची।तब डेनियल विटोरी ने एलान किया कि विश्व कप का फ़ाइनल उनका आख़िरी अंतरराष्ट्रीय मैच था।

* विश्व कप में बेहतरीन प्रदर्शन-विटोरी ने इस टूर्नामेंट में बेहतरीन गेंदबाज़ी कर न्यूज़ीलैंड को फ़ाइनल तक पहुंचाने में अहम योगदान दिया।उन्होंने नौ मैचों में 20।46 के औसत से कुल 15 विकेट लिए।विटोरी ने 18 साल की उम्र में साल 1997 में अपना करियर शुरू किया।
विटोरी, न्यूज़ीलैंड के सबसे ज़्यादा टेस्ट और वनडे खेलने वाले खिलाड़ी हैं।उन्होंने कुल 113 टेस्ट मैचों में 34।15 के औसत से 362 विकेट लिए हैं। न्यूज़ीलैंड की ओर से उनसे ज़्यादा टेस्ट विकेट सिर्फ़ सर रिचर्ड हैडली के नाम (431 विकेट) हैं।

टेस्ट मैचों में वो चार हज़ार रन और तीन सौ विकेट लेने वाले सिर्फ़ तीसरे खिलाड़ी हैं। उनसे पहले ये कारनामा सिर्फ़ कपिल देव और इयान बॉथम के नाम पर है। विटोरी ने 295 वनडे मैचों में 31।71 के औसत से 305 विकेट लिए हैं। वो वनडे में न्यूज़ीलैंड के सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज़ हैं।

वर्ष के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुने गये बीरेंद्र लाकड़ा और वंदना कटारिया

हॉकी इंडिया (एचआई) ने आज वार्षिक पुरस्कारों के विभिन्न श्रेणियों के अन्तर्गत खिलाड़ियों के सम्मानित किया। एचआई ने अपने पहले वार्षिक पुरस्कारों के तहत कुल 2 करोड़ 81 लाख 50 हजार रुपये खर्च किये। समारोह के दौरान 148 खिलाड़ियों को पुरस्कार दिये गये। अनुभवी मिडफील्डर बीरेंद्र लाकड़ा और फारवर्ड वंदना कटारिया को आज यहां पहले सालाना हॉकी इंडिया पुरस्कारों में क्रमश: सर्वश्रेष्ठ पुरूष और महिला खिलाड़ी चुना गया।  यहां रंगारंग कार्यक्रम के बीच हुए पहले हॉकी इंडिया पुरस्कारों में कुल दो करोड़ 81 लाख 50 हजार रुपये के पुरस्कार पिछले साल सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों, सहयोगी स्टाफ और हॉकी को विशिष्ट योगदान देने वालों को प्रदान किये गए। वर्ष के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी के ध्रुव बत्रा पुरस्कार के तौर पर वंदना और बीरेंद्र को 25-25 लाख रूपये प्रदान किये गए।
वर्ष के सर्वश्रेष्ठ उदीयमान अंडर 21 खिलाड़ी का जुगराज सिंह पुरस्कार हरमनप्रीत सिंह और महिला खिलाड़ी के लिये असुंथा लाकड़ा पुरस्कार नमिता टोप्पो को दिया गया। वहीं वर्ष के सर्वश्रेष्ठ गोलकीपर का बलजीत सिंह पुरस्कार भारतीय टीम के गोलकीपर पी आर श्रीजेश को मिला।
वर्ष 2014 के सर्वश्रेष्ठ डिफेंडर का पुरस्कार महिला टीम की डिफेंडर दीपिका को मिला। वहीं सर्वश्रेष्ठ मिडफील्डर का अजितपाल सिंह पुरस्कार भारतीय पुरूष टीम के मनप्रीत सिंह को और सर्वश्रेष्ठ फारवर्ड का धनराज पिल्लै पुरस्कार आकाशदीप सिंह को मिला। इन सभी को पुरस्कार के तौर पर पांच-पांच लाख रूपये दिये गए। बेहतरीन उपलब्धि के लिये हॉकी इंडिया अध्यक्ष का विशेष पुरस्कार स्टिक टू हॉकी डॉटकाम के आर अरूमुघम को दिया गया। वहीं सर्वश्रेष्ठ कोच और सहयोगी स्टाफ के लिये जमन लाल शर्मा पुरस्कार जूनियर टीम के कोच हरेंद्र सिंह को मिला।

इस मौके पर पिछले साल अर्जुन पुरस्कार के लिये हॉकी इंडिया ने जिन सात खिलाड़ियों के नाम की अनुशंसा की थी, उन्हें भी दो-दो लाख रूपये नकद पुरस्कार और ट्राफी दी गई। इनमें फारवर्ड तुषार खांडकर, शिवेंद्र सिंह, धरमवीर सिंह गोलकीपर भरत छेत्री, डिफेंडर वी आर रघुनाथ और महिला खिलाड़ी रितु रानी और जायदीप कौर शामिल है। इनमें से किसी को अर्जुन पुरस्कार नहीं मिला था।
200 अंतरराष्ट्रीय मैच पूरे करने वाले भारतीय टीम के कप्तान सरदार सिंह, महिला कप्तान रितु रानी और सौ अंतरराष्ट्रीय मैच पूरे करने वाले पी आर श्रीजेश, वंदना कटारिया, मनप्रीत सिंह, रूपिंदर पाल सिंह, सौंदर्या येंडाला, सविता के अलावा अंपायर जावेद शेख को भी विशेष पुरस्कार दिये गए।
व्यक्तिगत पुरस्कारों में पहले मैच में गोल करने वाली गुरजीत कौर, वर्ष के सर्वश्रेष्ठ एएचएफ खिलाड़ी चुने गए मनप्रीत सिंह, चैम्पियंस ट्राफी में सर्वश्रेष्ठ गोलकीपर रहे पी आर श्रीजेश, सबसे उर्जावान खिलाड़ी रहे एस वी सुनील, नाल्को फैंस च्वाइस पुरस्कार जीतने वाले सरदार सिंह और सर्वश्रेष्ठ जूनियर खिलाड़ी रहे आकाशदीप सिंह को भी एक एक लाख रूपये दिये गए।

इनके अलावा राष्ट्रमंडल खेल 2014 में रजत पदक जीतने वाली पुरूष टीम के हर सदस्य को एक एक लाख रूपये और सहयोगी स्टाफ को 50-50 हजार रूपये दिये गए। इतनी ही राशि एफआईएच विश्व लीग का दूसरा चरण जीतने वाली भारतीय महिला टीम और सहयोगी स्टाफ को दी गई।

चौथा सुल्तान जोहोर कप जीतने वाली जूनियर पुरूष टीम को एक एक लाख रूपये और सहयोगी स्टाफ को 50-50 हजार रूपये मिले। एशियाई खेल 2014 में स्वर्ण पदक जीतकर रियो ओलंपिक 2016 के लिये सीधे क्वालीफाई करने वाली पुरूष टीम के प्रत्येक सदस्य को ढाई-ढाई लाख रूपये और ट्राफी और सहयोगी स्टाफ को एक एक लाख रूपये दिये गए। उन्हें यह पुरस्कार खेलमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने प्रदान किया। एशियाई खेल कांस्य पदक विजेता महिला टीम के प्रत्येक सदस्य को एक-एक लाख रूपये और सहयोगी स्टाफ को 50-50 हजार रूपये मिले।































सरदार बलबीर सिंह सीनियर को मेजर ध्यानचंद एचिवमेंट पुरस्कार


हॉकी के महान खिलाड़ी सरदार बलबीर सिंह सीनियर को हॉकी इंडिया द्वारा आयोजित वार्षिक पुरस्कार समारोह 2014 में मेजर ध्यानचंद एचिवमेंट पुरस्कार से सम्मानित किया गया। पुरस्कार स्वरुप उन्हें 30 लाख रुपये व स्मृति चिन्ह व प्रमाण पत्र दिया गया।
90 वर्षीय सरदार बलबीर सिंह सीनियर का जन्म , 10 अक्टूबर 1924हरिपुर, पंजाब में हुआ था। बलबीर सिंह भारत के ऐसे हॉकी खिलाड़ी हैं जिन्होने ओलम्पिक में रिकॉर्ड बनाया है ।


बलवीर सिंह भारत की उन तीन ओलम्पिक टीमों में शामिल थे जिसने स्वर्ण पदक जीता (लन्दन-1948, हेलसिंकी-1952 और मेलबोर्न-ओलम्पिक 1956 । उन्होने 1952 के ओलम्पिक में नीदरलैण्ड के विरुद्ध पांच गोल किये थे जो अभी तक रिकॉर्ड है । उन्हें प्रायः 'बलबीर सिंह सीनियर' कहा जाता है, ताकि हॉकी के दूसरे खिलाड़ी से भ्रम न हो ।

Wednesday, March 25, 2015

विश्व कप 2015  में भारतीय टीम का सफर

मेलबर्न: भारतीय क्रिकेट टीम आईसीसी विश्वकप-2015 शुरू होने से ठीक पहले ऑस्ट्रेलिया दौरे पर जिस खराब दौर से गुजर रही थी, उसे देखते हुए यह संभावना बिल्कुल नहीं जताई जा रही थी कि यह टीम इस बार अपना विश्व खिताब बचा सकेगी।
हालांकि विश्वकप शुरू होने के बाद से भारतीय टीम अलग ही रंग में नजर आ रही है। आईसीसी विश्वकप-2015 में भारत ने ग्रुप चरण के सारे मैच जीतकर क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया है, जहां उसने बांग्लादेश को 192 रनों से हराया। अब भारतीय टीम का सामना सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया से होगा।  
आइए नजर डालते हैं इस विश्व कप में भारतीय टीम के अब तक के सफर पर :

भारतीय टीम ने अभियान का आगाज चिर प्रतिद्वंद्वी टीम पाकिस्तान के खिलाफ किया। इस हाई प्रोफाइल मैच में हर बार की तरह भारतीय टीम एक बार फिर अव्वल साबित हुई और विश्वकप में पाकिस्तान के खिलाफ कभी न हारने के रिकॉर्ड को बरकरार रखा।

 भारत ने यह मैच 76 रनों से जीता। विराट कोहली (107) और सुरेश रैना (74) की शानदार पारियों की बदौलत भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए सात विकेट के नुकसान पर 300 रन बनाए। जवाब में पाकिस्तान 224 पर सिमट गया। मोहम्मद समी ने चार विकेट हासिल किए।

भारत ने दूसरी जीत दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मेलबर्न में दर्ज की। भारत ने यहां एक बार फिर पहले बल्लेबाजी करते हुए सात विकेट के नुकसान पर 307 रन बनाए। इस बार शिखर धवन का बल्ला चला और उन्होंने 137 रनों की पारी खेली। जवाब में दक्षिण अफ्रीकी टीम 177 पर सिमट गई। विश्वकप इतिहास में दक्षिण अफ्रीका पर भारत की यह पहली जीत रही।

भारत ने अपनी तीसरी जीत संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) पर पर्थ में दर्ज की। भारत के लिए यह एक आसान मैच रहा। भारतीय गेंदबाजों में बेहद शानदार प्रदर्शन करते हुए विश्वकप में किसी एक मैच में सर्वाधिक कम रन पर विपक्षी टीम को समेट दिया। यूएई सिर्फ 102 रन बना सका। इस आसान लक्ष्य को हासिल करने में भारत को खास मुश्किल नहीं हुई और टीम ने 18.5 ओवर में एक विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया। इस मैच में रविचंद्रन अश्विन ने चार विकेट हासिल किए।

तीन शानदार जीत के बाद भारत को टूर्नामेंट में पहली बार वेस्टइंडीज के खिलाफ संघर्ष करना पड़ा। विश्व चैम्पियन भारतीय टीम हालांकि यहां भी चार विकेट से जीत हासिल करने में सफल रहा। वाका स्टेडियम में कैरेबियाई टीम पहले बल्लबाजी करते हुए 182 पर सिमट गई।

भारत को हालांकि इस औसत लक्ष्य को हासिल करने में अपने छह विकेट गंवाने पड़े। कप्तान महेंद्र सिंह धोनी यहां टूर्नामेंट में पहली बार बल्ले से जौहर दिखाते नजर आए और 45 रनों की नाबाद पारी खेल कर टीम को जीत दिलाई।

शुरुआती चार मैच ऑस्ट्रेलिया में खेलने के बाद पांचवें मैच के लिए भारतीय टीम ने न्यूजीलैंड का रुख किया और हेमिल्टन में आयरलैंड के खिलाफ अपनी पांचवीं जीत हासिल की। आयरलैंड द्वारा रखे गए 260 रनों के लक्ष्य को भारत ने 37वें ओवर में दो विकेट के नुकसान पर हासिल कर लिया। धवन (100) ने यहां एक बार फिर शतकीय पारी खेली जबकि समी ने तीन सफलताएं हासिल कीं।

न्यूजीलैंड में ही ऑकलैंड के ईडन पार्क में भारत ने अपने आखिरी ग्रुप मैच में जिम्बाब्वे को छह विकेट से हराया। भारतीय टीम हालांकि 288 के लक्ष्य का पीछा करते हुए एक समय 100 रनों के अंदर ही चार विकेट गंवा चुकी थी और मुश्किल में नजर आ रही थी, लेकिन रैना (110 नाबाद) और धोनी (85 नाबाद) ने पांचवें विकेट के लिए 196 रनों की साझेदारी कर टीम को जीत दिलाई।
विश्वकप सेमीफाइनल में भारत के सामने ऑस्ट्रेलिया की कठिन चुनौती


विश्व कप के दूसरे सेमीफाइनल में भारतीय टीम के सामने ऑस्ट्रेलिया के रूप में अब तक की सबसे कठिन चुनौती होगी और उसे हर विभाग में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा। छह सप्ताह पहले ही दोनों टीमें टेस्ट और त्रिकोणीय एकदिवसीय श्रृंखला में एक दूसरे से खेल चुकी है जिसमें माइकल क्लार्क की टीम का पलड़ा भारी रहा था।
क्रिकेट के इतिहास में ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच एशेज प्रतिद्वंद्विता और भारत-पाकिस्तान मुकाबलों के अलावा पिछले कुछ साल में भारत और ऑस्ट्रेलिया के मैच भी कम प्रतिस्पर्धी नहीं हुए हैं। यह मुकाबला डेविड वार्नर की बल्लेबाजी और मोहम्मद शमी की गेंदबाजी का भी होगा, मिशेल स्टार्क की कहर बरपाती गेंदों और रनों के रूप में शरारे उगलते विराट कोहली के बल्ले का भी होगा, आर अश्विन की कैरम बॉल और ग्लेन मैक्सवेल की आक्रामक बल्लेबाजी का भी होगा। सभी की नजरें कोहली पर होंगी जो पहले मैच में पाकिस्तान के खिलाफ शतक बनाने के बाद से एक अर्धशतक भी नहीं बना सके है। कोहली हालांकि दबाव में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने में माहिर हैं और उनके पास यह सबसे बड़ा मौका है। सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर दोनों टीमें कल एक दूसरे के आमने सामने होंगी तो यह मुकाबला कमोबेश बराबरी का होगा जिसमें पिछले प्रदर्शन मायने नहीं रखेंगे।
ऑस्ट्रेलिया दौरे के उस शर्मनाक प्रदर्शन का गम भारत ने विश्व कप में शानदार खेल दिखाकर दूर कर दिया। विश्व कप से पहले दिशाहीन लग रही टीम इंडिया का अचानक मानो कायाकल्प हो गया और उसके प्रदर्शन ने विरोधियों को भी चकित कर डाला। आम तौर पर भारत की कमजोर कड़ी मानी जाने वाली गेंदबाजी उसकी ताकत साबित हुई है। मोहम्मद शमी (17 विकेट), उमेश यादव (14) और मोहित शर्मा (11) मिलकर 70 में से 42 विकेट ले चुके हैं। भारतीय गेंदबाजों ने सात मैचों में पूरे 70 विकेट चटकाये हैं।
ऑस्ट्रेलिया के लिये सबसे बड़ी चुनौती सिडनी की पिच होगी, जो उसे रास नहीं आती। इस धीमी पिच पर दक्षिण अफ्रीका ने क्वार्टर फाइनल में श्रीलंका को हराया था, जिसमें इमरान ताहिर ने चार और जेपी डुमिनी ने तीन विकेट लिये थे। ऐसे में भारत के अश्विन और रविंद्र जडेजा उन पर भारी पड़ सकते हैं। अश्विन 12 विकेट ले चुके हैं और अपनी गेंदों से ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों के लिये परेशानी का सबब बन सकते हैं। दूसरी ओर ऑस्ट्रेलिया को टीम में एक अच्छे स्पिनर की कमी खलेगी। उसके पास धीमे गेंदबाज के रूप में सिर्फ स्टीवन स्मिथ हैं।
दोनों टीमें इस प्रकार हैं :
भारत :
महेंद्र सिंह धोनी (कप्तान), रोहित शर्मा, शिखर धवन, अजिंक्य रहाणे, विराट कोहली, सुरेश रैना, आर अश्विन, रविंद्र जडेजा, मोहित शर्मा, मोहम्मद शमी, उमेश यादव, भुवनेश्वर कुमार, अक्षर पटेल, अंबाती रायुडू, स्टुअर्ट बिन्नी।
ऑस्ट्रेलिया :
माइकल क्लार्क (कप्तान), जार्ज बेली, डेविड वार्नर, आरोन फिंच, शेन वाटसन, स्टीवन स्मिथ, ब्राड हाडिन, ग्लेन मैक्सवेल, मिशेल मार्श, जेम्स फाकनेर, मिशेल जानसन, मिशेल स्टार्क, जोश हेजलवुड, पैट कमिंस, जेवियर डोहर्टी।