Sunday, September 12, 2010

विश्व कुश्ती प्रतियोगिता में चली सुशील की दबंगई


ओलंपिक कांस्य पदक विजेता सुशील कुमार ने विश्व कुश्ती प्रतियोगिता के खिताबी मुकाबले में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। खिताबी मुकाबले में सुशील ने रूसी खिल़ाडी गोगाएव अलान को 3-1 से हराया। यह उपलब्धि हासिल करने वाले सुशील देश के पहले पहलवान हैं।


जानकारी हो कि इस प्रतियोगिता के पहले दौर में ही सुशील को बाई मिल गई थी। उसके बाद उन्होंने ग्रीस के आकृतिदिस, जर्मनी के मार्टिन सेबास्टियन और मंगोलिया के बुयान जाव को अलग-अलग दौर में मात देकर सेमीफाइनल तक का सफर तय किया। सेमीफाइनल में सुशील ने अजरबैजान के हासानोव जाबरायिल को हराया। सुशील कुमार के अलावा कोई अन्य भारतीय इस प्रतियोगिता में पदक की दौड़ में ज्यादा दूर नहीं दौड़ पाया।


सुशील कुमार के गुरु महाबली सतपाल ने उनकी इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि यह हमारे लिए अविस्मरणीय क्षण है, जिसका हमें सालों से इंतजार था। सतपाल ने कहा सुशील मेरे पास 12 वर्ष की उम्र में आया था और पिछले सालों में मुझे जिस बात का इंतजार था सुशील ने आखिर वह काम कर दिखाया।


उन्होंने बताया कि सुशील ने रूसी पहलवान को लगातार दो राउण्ड में हराकर यह साबित कर दिया कि वह इस वजन वर्ग में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पहलवान हैं। सतपाल ने कहा कि सुशील ने विश्व प्रतियोगिता में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने का जो वादा किया था उसे उन्होंने पूरा कर दिखाया।

उल्लेखनीय है कि सुशील ने 2006 में दोहा एशियाई खेलों में काँस्य पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का पहला परिचय दिया था। अर्जुन पुरस्कार विजेता सुशील ने अगले ही साल मई 2007 में सीनियर एशियाई प्रतियोगिता में रजत पदक जीता और फिर कनाडा में आयोजित राष्ट्रमंडल कुश्ती प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल किया।

अजरबैजान में हुई विश्व कुश्ती प्रतियोगिता में वे हालाँकि आठवें स्थान पर पिछड़ गए थे लेकिन उसने यहीं से बीजिंग ओलंपिक खेलों के लिए क्वालीफाई कर लिया था। सुशील ने इस साल कोरिया में आयोजित सीनियर एशियाई कुश्ती प्रतियोगिता में काँस्य पदक जीता था।

Thursday, September 2, 2010

पाक खिलाड़ियों के नापाक कारनामे

खेलों की दुनिया में जब क्रिकेट का अवतरण हुआ था तब इसको भद्र पुरुषों के खेल की संज्ञा दी गई थी लेकिन धीरे-धीरे इस खेल की बढ़ती लोकप्रियता ने क्रिकेट को भद्र पुरुषों के खेल की जगह भ्रष्ट पुरुषों का खेल बना दिया। खेल-खेल में अमीर बनने की चाहत में खिलाड़ियों ने मैच के नतीजे पहले से ही निर्धारित करने शुरू कर दिए और इस काम की शुरुआत की पाकिस्तानी क्रिकेट खिलाड़ियों ने।

पाकिस्तानी खिलाड़ियों का इतिहास मैच फिक्सिंग से सना हुआ है। कभी खिलाड़ी जानबूझकर मैच हार जाते हैं, कभी पैसे के लिए गलत खेलते हैं, तो कभी सिर्फ जीतने के लिए गेंद का रूप बदल देते हैं।

इस कुकर्म में सबसे पहला नाम है, विश्व क्रिकेट में अब तक के सबसे कामयाब गेंदबाजों में से एक और पाकिस्तान क्रिकेट के आखिरी सुपरस्टार वसीम अकरम की। न्यूजीलैंड के पूर्व तेज गेंदबाज और कमेंटेटर साइमन डॉल ने 1994 के पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के न्यूजीलैंड दौरे का हवाला देते हुए एक रेडियो प्रोग्राम में कहा कि श्रृंखला के आखिरी टेस्ट क्राइस्टचर्च में उन्हें लगा कि तेज गेंदबाज वसीम अकरम जानबूझकर नो बॉल फेंक रहे हैं। पूरी श्रृंखला में पाकिस्तानी गेंदबाजों ने शानदार गेंदबाजी की थी लेकिन क्राइस्टचर्च में आते ही ना जाने उन्हें क्या हो गया। अकेले अकरम ने आखिरी पारी में 12 नो वॉल फेंके जिसे देखकर उन्हें काफी हैरानी हुई।

उस टेस्ट में न्यूज़ीलैंड को जीतने के लिए 324 रनों की जरूरत थी जो चौथी पारी के लिहाज़ से आसान नहीं था लेकिन पाकिस्तानी गेंदबाजों ने ऐसे हथियार डाले मानो वो न्यूज़ीलैंड को जिताना चाहते हों। यही नहीं पाकिस्तानी गेंदबाज़ों ने जमकर शॉर्ट गेंदें भी डालीं जिसकी वजह से न्यूजीलैंड को काफी रन मिले। हालांकि उस वक्त उनका ध्यान स्पॉट फिक्सिंग की तरफ इसलिए नहीं गया क्योंकि टेस्ट मैच की जीत एक बड़ी जीत थी और वो उसके जश्न में मस्त हो गए लेकिन इंग्लैंड दौरे पर हालिया खुलासे के बाद उन्हें अब लग रहा है कि उस दौरान भी कुछ गड़बड़ जरूर थी।

डॉल जिस श्रृंखला का जिक्र कर रहे हैं उसे पाक शुरुआती दो टेस्ट जीतकर अपने नाम कर चुका था। सबको उम्मीद थी कि तीसरा टेस्ट जीतकर पाक क्लीन स्वीप करेगा। मैच के तीसरे दिन तक ये भरोसा और पुख्ता हो गया लेकिन अचानक जैसे पाक गेंदबाज गेंदबाजी करना भूल गए थे। सीरीज में 25 विकेट लेकर मेजबान बल्लेबाजों में खौफ भरने वाले अकरम ने जमकर शॉर्ट गेंदें फेंकी जिसका किवियों को फायदा हुआ। अकरम ने इस पारी में 12 नो बॉल फेंकी जो सबको हैरान कर देने वाला आंकड़ा था।

न्यूजीलैंड श्रृंखला में अकरम पर फिक्सिंग के आरोप पहली बार नहीं लगे हैं। फिक्सिंग मामले पर पर्दाफाश करने वाले पाक के रिटायर्ड जस्टिस कयूम ने कहा कि उन्हें इस मामले की पहले से जानकारी थी। जस्टिस कयूम ने ही पहले ये कहकर सबको चौंका दिया था कि उनकी जांच में वसीम अकरम फिक्सिंग के दोषी पाए गए थे लेकिन उनको सजा देने के मामले में वो नरम पड़ गए। क्योंकि वे उनके फैन थे। इसके पहले भी अकरम पर 1996 में वर्ल्ड कप क्वार्टर फाइनल में ना खेलने का आरोप लगा था। 1997 में शारजाह में बल्लेबाजी क्रम में छेड़छाड़ के आरोप से भी वो घिरे रहे।

वर्ष 1994 के मैच में अकरम पर अताउर रहमान को पैसा देकर खराब गेंदबाजी करवाने का भी आरोप लगा था। अताउर रहमान को जांच में दोषी पाया गया था और उनपर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया गया, लेकिन अकरम जांच में साफ बच निकले। उनके खिलाफ ठोस सबूत ना होने की वजह से उन्हें सजा नहीं मिली हालांकि उनकी तब काफी आलोचना हुई थी, कप्तानी तक छिन गई थी। इसके अलावा 3700 पाउंड का जुर्माना भी भरना पड़ा था।

पाकिस्तान के सर्वश्रेष्ठ तेज गेंदबाज वसीम अकरम के बाद मुश्ताक अहमद, वकार यूनिस, इंजमाम उल हक और सइद अनवर भी ऐसे खिलाड़ी हैं जिनपर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड की जांच समिति के प्रमुख जस्टिस कय्यूम ने मैच फिक्सिंग की जाँच करते हुए 1998 में जुर्माना लगाया था।

इसके बाद 1999 के विश्वकप में पाकिस्तान बांग्लादेश के विरुद्ध लीग मैच जानबूझकर हार गया था। हालांकि पाकिस्तान टीम इससे पाक साफ निकल गई थी। साल 2007 में भी विश्वकप में पाकिस्तान की टीम आयरलैंड जैसी कमजोर टीम से हार गई। इसके बाद विवाद और तब गहरा गया जब टीम के कोच बॉब वूल्मर होटल रूम में मृत पाए गए।

वर्तमान में इंग्लैंड दौरे पर गई पाकिस्तान की युवा टीम ने फिर अपना पुराना इतिहास दोहराते हुए लॉर्ड्‍स टेस्ट मैच में फिक्सिंग करते हुए पाकिस्तान को शर्मसार कर दिया। इस मैच में करोड़ों रुपए के एवज में नो बॉल फिक्स की गई थी। जिसमें पाकिस्तान टीम के कप्तान सलमान बट्ट, गेंदबाज मोहम्मद आमेर और मोहम्मद आसिफ और विकेट कीपर कामरान अकमल का नाम शामिल है।

इस मैच के दौरान लगातार तीन-तीन नो गेंदें फेंकी गईं थीं। लंदन के मैच फिक्सर मजहर माजीद ने 150 हजार पाउंड में इन नो गेंदों को फिक्स किया था। पाकिस्तानी खिलाड़ियों द्वारा खेल के साथ किए गए इस तरह के खिलवाड़ से साबित होता है कि पैसा इंसान के ईमान को बहका सकता है। क्रिकेट के साथ ग्लैमर और दौलत दोनों साथ आते है। ऐसे में खिलाड़ियों का बहकना स्वाभाविक है। जब तक क्रिकेट के साथ पैसा जुड़ा है मैच फिक्सिंग के ऐसे गुनाह होते रहेंगे।

Monday, August 23, 2010

मानव संसाधन मंत्रालय ने आनंद की नागरिकता पर उठाये सवाल




हैदराबाद। विश्व के शीर्ष भारतीय शतरंज खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद की नागरिकता पर मानव संसाधन मंत्रालय ने सवाल खड़े कर दिए हैं। यह पूरा विवाद हैदराबाद विश्वविद्यालय द्वारा आनंद को मानद डॉक्टरेट उपाधि देने के फैसले के बाद हुआ है। दरअसल जब भी केंद्रीय विश्वविद्यालय किसी को मानद उपाधि देता है तो केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय इस मामले में फैसला लेता है।


मानव संसाधन मंत्रालय का कहना है कि आनंद विदेश में रहते हैं। इसलिए उनकी नागरिकता के बारे में विदेश मंत्रालय ही फैसला लेगा। जबकि आनंद की पत्नी अरूणा आनंद का कहना है कि विश्वनाथन आनंद अपनी ट्रैनिंग के लिए स्पेन जरूर जाते हैं लेकिन वो पक्के भारतीय है। अरूणा ने यूनिवर्सिटी को आनंद का भारतीय पासपोर्ट भी उपलब्ध कराया है।


यह हमारे देश का दुर्भाग्य ही है कि पूरे विश्व में भारत का नाम ऊँचा करने वाले आनंद की नागरिकता पर सवाल उठाया जा रहा है। आनंद की नागरिकता पर किसी भी तरह का सवाल उठाना उनका अपमान करने जैसा ही है।

Monday, August 16, 2010

घपलों-घोटालों का खेल बना ‘राष्ट्रमंडल खेल’


नई दिल्ली। भारत में सन् 1982 में हुए एशियाई देशों के खेलों "एशियाड 82" के पश्चात अब दूसरी बार 19वें राष्ट्रमंडल खेलों के रूप में कोई इतना बड़ा आयोजन देश में होने जा रहा है। जिनमें 71 देशों के 8 हजार खिलाड़ी व अधिकारी, 17 विभिन्न प्रकार के खेलों में भाग लेंगे।


इन खेलों की मेजबानी के साथ देश का सम्मान भी जुड़ा हुआ है। लेकिन राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारियों में लापरवाही, पैसों की बर्बादी, भ्रष्टाचार और कथित घोटालों के तथ्य उजागर होने के बाद देश की अस्मिता एवं सम्मान दोनों दांव पर लग चुके हैं। यह जितना निराशाजनक है उतना ही क्षुब्ध करने वाला भी है। समय रहते किसी ने न तो इन बातों पर गौर किया कि राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारियां निर्धारित समय सीमा में पूरी हों और न ही खेलों के सफल आयोजन के लिए कोई समुचित कार्ययोजना बनाई जिससे खेलों की आड़ में होने वाले घोटालों का पर्दाफाश हो सके।


अब जब इन खेलों के शुरू होने में केवल 56 दिन बचे हैं तो आइए नजर डालते हैं कि इसकी मेजबानी के लिए हम कितने तैयार हैं:-


खेलों के आयोजन के लिए अभी तक सारे स्टेडियम ही तैयार नहीं हुए हैं। तैराकी स्पर्धा के लिए तैयार किए गये एस.पी. मुखर्जी स्टेडियम के पहले ही ट्रायल में पूल के टाइल्स निकल जाने की वजह से दो तैराक घायल हो चुकें हैं।


इस पूल को तैयार करने में 377 करोड़ रूपये लगे थे। दिल्ली सरकार ने 770 करोड़ रूपये के साथ इस आयोजन के लिए काम शुरू किया था लेकिन अभी तक 11 हजार करोड़ रूपये खर्च हो चुके हैं।

अब बात करते हैं राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान पूरे आयोजन का केंद्र रहने वाले जवाहरलाल नेहरु स्टेडियम की, जिसमें उद्घाटन समारोह से लेकर एथलेटिक्स, लॉन बाउल्स और भारोत्तोलन जैसी स्पर्धाएं आयोजित की जाएँगी।

नए सिरे से बने इस स्टेडियम का उद्घाटन 27 जुलाई को किया गया, लेकिन यह तय सीमा से 6 महीने बाद हुआ है। यहाँ अब भी काम जारी है, जिसका सीधा मतलब है कि उद्घाटन करना भी महज रस्म अदायगी है क्योंकि अभी इस स्टेडियम में कई चीजों पर काम चल रहा है।

इसके अलावा आर.के खन्ना स्टेडियम में बनने वाली सिंथेटिक सर्फेस के काम में भी भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। आर.के खन्ना स्टेडियम में बने 14 कोर्ट्स का सिंथेटिक सर्फेस का काम ऑस्ट्रेलियाई कंपनी रिबाउंट एस को दिया गया, जिसमें कॉमनवेल्थ ऑर्गनाइजिंग कमेटी के कोषाध्यक्ष अनिल खन्ना का बेटा आदित्य खन्ना सीईओ है।

खिलाड़ियों के आवास हेतु बनाए जा रहे राष्ट्रमंडल खेल गाँव का काम भी पूरा नहीं हुआ है। दिल्ली विकास प्राधिकरण ने यहाँ बन रहे 1100 फ्लैट को सुसज्जित करने के लिए भारतीय पर्यटन विकास निगम को सौंपा था। यहाँ अब तक काम पूरा हो जाना चाहिए था लेकिन अभी तक यह काम भी अधूरा पड़ा है।

राजधानी में इतने बड़े आयोजन के लिए दिल्ली नगर निगम सीधे तौर पर राष्ट्रकुल खेल के प्रोजेक्ट से जुड़ा ही नहीं है। डीएमसी के जिम्मे सड़कों के निर्माण से लेकर फुटपाथ, लैंडस्कैपिंग और वाहनों की पार्किंग व्यवस्था सहित साफ-सफाई से जुड़े काम थे, जो अभी तक अधूरे हैं। सभी परियोजनाओं में से सिर्फ जवाहरलाल नेहरु स्टेडियम के पास 700 बसों के लिए पार्किंग व्यवस्था करने का काम एमसीडी ने तकरीबन पूरा कर लिया है।

आयोजन पर अनुमानित व्यय
मात्र बारह दिन के राष्ट्रमंडल खेलों के इस आयोजन पर शुरु में कुल 63,284 करोड़ रुपयों के खर्च होने का अनुमान लगाया गया था। इसमें दिल्ली सरकार का अपना योगदान 16,580 करोड़ रुपयों का था। लेकिन ताजा आकलन के अनुसार सभी परियोजनाओं को पूरा करने में 80 हजार करोड़ से भी ज्यादा के खर्च होने की उम्मीद है।

जानकारी के मुताबिक, खेलों की हाई-टेक सुरक्षा का ही ठेका एक कंपनी को 370 करोड़ रूपये में दिया गया है। किन्तु यह उस खर्च के अतिरिक्त होगा, जो सरकारी पुलिस, यातायात पुलिस और सुरक्षा बलों की तैनाती के रुप में होगा और सरकारी सुरक्षा एजेंसियां स्वयं विभिन्न उपकरणों की विशाल मात्रा में खरीदारी करेंगी।

खेलों में व्याप्त भ्रष्टाचार
राष्ट्रमंडल खेल देश के लिए जितना बड़ा आयोजन है उससे भी ज्यादा इन खेलों में घोटाले हुए हैं। आयोजन से जुड़ी 16 परियोजनाओं में केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने 2,500 करोड़ रुपए से अधिक की अनियमितिता का खुलासा किया है।

सीवीसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि राष्ट्रमंडल खेल गांव तरणताल, प्रशिक्षण हॉल और एथलेटिक्स ट्रैक सहित इन खेलों से जुड़ी 16 परियोजनाओं के दौरान भारी अनियमितिता बरती गई है।

इसके अलावा दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए), केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) द्वारा नेशनल स्टेडियम और एसपीएम तैराकी स्थल में किए गए पुनर्निमाण कार्य के दौरान भी धांधली की गई है।

इन परियोजनाओं में खेल संकुलों का उन्नयन और सड़कों को चौड़ा करने संबंधी परियोजनाएं शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि सीवीसी ने इस मामले में दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) सहित कुछ और एजेंसियों के अधिकारियों के विरुद्ध सीबीआई से जांच करने को कहा है।

एक ओर जहाँ केंद्रीय सतकर्ता आयोग ने अपनी रिपोर्ट में यह कहा है कि ज़्यादातर निर्माण कार्य में प्रक्रिया संबंधी उल्लंघन पाए गए हैं, तो दूसरी ओर एक अनजानी सी कंपनी को लाखों पाउंड देने का मामला भी तूल पकड़ रहा है। ताज़ा मामला लंदन की एक ऐसी कंपनी का है जिसे लाखों पाउंड दिए गए। एक निजी टीवी चैनल ने अपनी विशेष रिपोर्ट में इस कंपनी पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं।

हालाँकि राष्ट्रमंडल खेलों की आयोजन समिति के महासचिव ललित भनोट का कहना है कि जो भी पैसे कंपनी के खाते में स्थानांतरित किए गए हैं, उसके लिए सभी प्रक्रियाओं का पालन किया गया।

भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद हड़बड़ी में बुलाए गए एक संवाददाता सम्मेलन में ललित भनोट ने कहा, "हमने रिज़र्व बैंक से अनुमति ली थी। कंपनी से सामान ख़रीदने के लिए जो भी प्रक्रिया का पालन करना था, हमने किया। हर चीज़ें पारदर्शी हैं।"

इनके अलावा राष्ट्रमंडल खेलों के लिए खरीदी गई डीटीसी की बसों में भी भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। इन डीटीसी की बसों में हल्की क्वालिटी के सामानों का इस्तेमाल हुआ है। इस सिलसिले में सीबीआई ने सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट यानी सीआईआरटी के तीन अधिकारियों और अशोक लेलैंड के दो नुमांइदों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इन पर आपराधिक साजिश रचने, धोखाधड़ी, जालसाजी और भ्रष्टाचार के मामलों में केस दर्ज किया जा चुका है।

उल्लेखनीय है कि राजधानी दिल्ली की सड़कों पर 3000 लो फ्लोर बसें हैं। डीटीसी ने अशोक लेलैंड कंपनी को 5,000 सीएनजी बसों का ऑर्डर दिया था।

इन सब खुलासों के बाद देशवासियों के सामने एक ही प्रश्न है, कैसे रहेगी देश की शान, जिसको मिट्टी में मिलाने में कुछ नेताओं ने कोई कसर नहीं छोड़ी है।
वीएचवी। सुनील दूबे। खेल संवाददाता। 06 अगस्त, 2010

इतिहास पुरूष की ऐतिहासिक पारी को शत् शत् नमन


ग्वालियर। चौबीस फरवरी का दिन भारतीय क्रिकेट प्रेमियों और क्रिकेट जगत में लंबे समय तक याद रखा जायगा। ग्वालियर के कैप्टन रुप सिंह स्टेडियम में इसी दिन क्रिकेट के सुपरमैन सचिन रमेश तेंदुलकर ने भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच खेले गये दूसरे एकदिवसीय मैच में धुआंधार पारी खेलते हुए सिर्फ 147 गेंदों में 25 चौकों, 3 गगनचुम्बी छक्कों की मदद से नाबाद 200 रन बनाए।




एकदिवसीय क्रिकेट के इतिहास के 40 साल और 2,961 मैचों के बाद कोई खिलाड़ी पहला दोहरा शतक लगाने में कामयाब हुआ है। यह शतक उस खिलाड़ी ने लगाया जो पिछले 22 वर्षों से लगातार क्रिकेट खेल रहा है। आज भारत सहित पूरे विश्व क्रिकेट में सिर्फ तेंदुलकर के धुआंधार 200 रनों की पारी की चर्चा है। इनके एकदिवसीय रिकॉर्ड का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके एकदिवसीय रिकॉर्ड टीम के शेष दस खिलाड़ियों के कुल रिकॉर्डो से श्रेष्ठ हैं। टीम के बाकि खिलाड़ी भी मिलकर सचिन की बराबरी नहीं कर पाए हैं।..




सचिन ने 200 रन की नाबाद पारी 36 साल 306 दिन की उम्र में खेली है। जबकि पाकिस्तान के सईद अनवर ने जब 194 रन बनाए थे, तो उनकी उम्र 29 साल थी। स्पष्ट है कि सचिन की उम्र भले ही बढ़ती जा रही है, लेकिन इसका असर उनके खेल पर नहीं पड़ रहा है। अनवर ने सचिन कि इस पारी कि तारीफ करते हुए कहा, "मैंने भारत के खिलाफ 194 रन बनाकर सर्वाधिक व्यक्तिगत रन का विश्व रिकॉर्ड बनाया था। मेरे इस रिकॉर्ड को तोड़ने की क्षमता सचिन में ही थी। मुझे कोई गम नहीं है क्योंकि मेरा रिकॉर्ड सचिन तेंडुलकर ने तोड़ा है जो निर्विवाद रूप से विश्व के सबसे चहेते क्रिकेटर हैं।"


कभी सचिन को सपने में देखने वाले पूर्व ऑस्ट्रेलियाई फिरकी गेंदबाज़ शेन वार्न ने कहा कि शुक्र है कि वे सचिन को गेंदबाजी नहीं कर रहे थे। वार्न ने कहा कि जैसे ही सचिन 190 पर पहुंचे तो टीवी देखते हुए मैं चिल्ला पड़ा ‘कमऑन सचिन, तुम डबल सेंचुरी का नया रिकॉर्ड बना सकते हो।


कभी सचिन के जोड़ीदार रहे भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल कप्तान सौरव गांगुली ने सचिन के इस दोहरे शतक को बेहद शानदार पारी करार दिया। उन्होंने कहा कि सचिन दुनियां के सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर हैं। रवि शास्त्री ने उनकों रन मशीन कहकर पुकारा है, तो वहीं बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन ने सचिन के बारें में कहा कि मास्टर ब्लास्टर साल दर साल अपने प्रदर्शन से चौकाते रहे हैं। टॉप ग्रेड के उनके खेल के कारण ही वे सफलता के शीर्ष पर बने हुए हैं। उनकी उपलब्धियां अद्भुत हैं। इन सारी खूबियों के बावजूद वे जमीन से जुड़े व्यक्ति हैं। हर कोई इस दोहरे शतक की पारी को देखकर गदगद है।

सचिन रमेश तेंदुलकर : क्रिकेट जीवन का एक सफल साधक
सचिन को क्रिकेट की ओर मोड़ने का श्रेय उनके बड़े भाई अजीत तेंदुलकर को जाता है। अजीत ने ही उन्हें खेल से जुड़ने की प्रेरणा दी। अगर अजीत ऐसा नहीं करते तो शायद क्रिकेट जगत को सचिन जैसा हीरा नहीं मिल पाता। राजापुर सारस्वत ब्राह्मण कुल में जन्में सचिन के दो बड़े भाई नितिन और अजीत एवं एक बहन हैं।



सचिन के पिता रमेश तेंदुलकर, मराठी उपन्यास के लेखक थे। सचिन ने अपने पिता से महानता के साथ जमीन से जुड़े रहने की कला सीखी। इतने प्रसिद्ध होने के बाद भी सचिन एक विनम्र और शालीन व्यक्ति हैं। यही बात उन्हें महान बनाती है। सचिन का सपना एक तेज गेंदबाज़ बनने का था। इसके लिए वे चैन्नई स्थित एमआरएफ पेस अकादमी ट्रायल देने भी पहुंचे थे। पर अफसोस वे अपने छोटे कद से मात खा गए।


अभ्यास करते समय जब सचिन थक जाते थे उनके कोच रमाकांत आचरेकर एक रुपए का सिक्का स्टंप्स पर रखकर कहते थे, जो सचिन का विकेट लेगा ये सिक्का उसका, और यदि सचिन आउट नहीं हुआ तो ये एक रुपया सचिन का। सचिन ने आज भी वो तेरह सिक्के संभाले कर रखे हैं। साल 1988 में एक स्कूल टूर्नामेंट में सचिन ने अपने परम मित्र विनोद कांबली के साथ मिलकर नया रिकार्ड बनाया था। कांबली के साथ 664 रन की रिकार्ड साझेदारी से सचिन ने भारतीय क्रिकेट में पहला धमाका किया।

लोकप्रिय खेलों की रोमांचक शब्दावली-"फुटबाल और हॉकी-"


फुटबाल दुनिया में सबसे ज्यादा खेले जाने वाले लोकप्रिय खेलों में शुमार है। जब यह खेला जाता है तो दर्शकों की इस खेल के प्रति दिवानगी देखते ही बनती है। इसको खेलना जितना मनोरंजक है, उतना ही इसमें प्रयुक्त होने वाली शब्दावली रोमांचित करने वाली है, तो आइये देखते हैं क्या है इस खेल की शब्दावली-

मिड फील्ड, सेंटर, स्ट्राइकर , पास, बैक पास, गोली, कार्नर, फारवर्ड, पेनल्टी, किक, डायरेक्ट किक, इनडायरेक्ट किक, फ्री किक, ड्रिबल, एक्स्ट्रा टाइम, फाउल, गोल, रेफरी, लाइंसमैन, ऑफ साइड, सीजर्स किक, बनाना किक, विंगर, स्वीपर, बैक, थ्रो इन, वाली, टच लाइन, सेंड ऑफ, नेट, बार्स, टाईब्रेकर, सडेन डेथ, कार्नर फ्लैग, कार्नर किक, फिस्ट, फर्स्ट हाफ, सेकेण्ड हाफ, लॉब, टैकेल, स्लाइडिंग टेकेल, ऑफ साइड, हैट्रिक, हैंडबाल, चिप, फेयर चार्ज, फार पोस्ट, बुकिंग, क्रास, किक आफ, गोल किक, मार्किंग, बाल पास, थ्रू वाल, टोटल फुटबाल, गोल्डन गोल, आदि।

प्रमुख शब्दों का विस्तार-
थ्रो इन- जब गेंद भूमि पर अथवा हवा में स्पर्श रेखा को पार करके पारित रेखा स्थल से अन्त में गेंद स्पर्श करने वाले खिलाड़ी के विपक्षी दल के किसी खिलाड़ी द्वारा किसी दिशा में अन्त:क्षेपित की जाए, तो इसे थ्रो इन कहते हैं।

ऑफ साइड- यदि कोई खिलाड़ी गेंद की अपेक्षा स्वयं विपक्षी गोल रेखा के निकटतम और अपनी ही टीम के खिलाड़ी को सीधा पास दे अथवा चला जाए तो उसे ऑफ साइड कहते हैं।

पेनल्टी किक- नियम विरूध्द खेलने पर किक करने का एक अवसर।

गोल्डन गोल- निर्धारित समय में मैच बराबर न होने की दशा में अतिरिक्त समय में बने गोल को गोल्डन गोल कहा जाता है।

हॉकी-
गोली, राइट बैक, लेफ्ट बैक, आउट साइड राइट, इनसाइड राइट, सेंटर फारवर्ड, इनसाइड लेफ्ट, आउट साइड लेफ्ट, सेटर हाफ, सेंटर लाइन , कार्नर, पेनल्टी स्ट्रोक, पेनल्टी कार्नर, फ्लिक, स्कूप, स्टिक, अम्पायर, लाइन्समैन, हाफ वाली, इनफ्रिंजमेंट, साइड लाइन, टाई ब्रेकर, सडेन डेथ, हैट्रिक, अण्डर कटिंग, सर्किल, बुली, रोड आन, पुश इन, शूटिंग सर्किल।

प्रमुख शब्दों के विस्तार-
बुली- खेल प्रारम्भ होने के समय हॉकी बाल को मारना बुली कहलाता है।

फ्री हिट- जब विपक्षी टीम गेंद को स्वतंत्र रूप से मारती है तो उसे फ्री हिट कहते हैं।

ड्रिब्लिंग- यह हॉकी गेंद को नियंत्रित करने की एक कला है।

जैब एण्ड लंग- गेंद को देना या बाहर करना 'जैब एण्ड लंग' कहलाता है।

पेनाल्टी कॉर्नर- नियम का उल्लंघन करने पर गोल करने का एक अवसर देना 'पेनाल्टी कार्नर' कहलाता है।

पेनाल्टी स्ट्रोक- यह गोल करने का एक आसान अवसर है।

डी- यह अर्ध्दवृत्ताकार एक रेखा है, जो गोल पोस्ट को घेरे रहती है।

एस्ट्रोटर्फ- यह कृत्रिम घास का एक ऐसा मैदान है, जो आधुनिक तकनीक से लोहे के तार पर प्लास्टिक चढ़ाकर बनायी गयी कृत्रिम घास से निर्मित होता है।

क्रिकेट के खेल से संबंधित शब्दावली -


किसी भी खेल को खेलने के पहले उस खेल के नियम और शब्दावली को जानलेना बहुत जरूरी होता है। वर्तमान समय में क्रिकेट का खेल काफी लोकप्रिय है तो आइये जानते हैं क्रिकेट के खेल से संबंधित शब्दावली जिनका इस खेल को खेलते समय अत्यधिक प्रयोग होता है -


क्रिकेट शब्दावली-
एशेज, रबर, वेल्स, बैट, डेड बॉल, एक्स्ट्रा , फाइन लेग, विकेट, विकेट कीपर, स्क्वायर लेग, गली, मिड आफ, मिड आन, मिड विकेट, बैट्समैन, बॉलर, फाइन लेग, शार्ट लेग, स्लिप्स, कवर, एक्स्ट्रा कवर, थर्डमैन, गुगली, आफ स्पिन, लेग स्पिन, चायनामैन, फ्लाइट, इन स्विंग, आउट स्विंग, रिवर्स स्विंग, बंपर, बीमर, फुल टॉस, शार्ट पिच, वाइड, नो बाल, ओवर, ओवर द विकेट, राउंड द विकेट, मेडेन, वाइड बाल, हैंडल द बाल, हिट विकेट, प्लेड आन, रन आउट, स्टम्पड आउट, बोल्ड, कैच, कॉट, फालोऑन, थ्रो, ओवर थ्रो, पैड, प्रोटेक्शन गार्ड, हेलमेट, पिच, क्रीज, नाट आउट, सीम, शूटर, स्लाग ओवर, अम्पायर, इनिंग्स, ग्लब्स, कैप, बाउंडरी, ओवर बाउंडरी, फील्डर, लेग बिफोर विकेट, शार्ट रन आदि।

कुछ प्रमुख शब्दों का विस्तार-
लेग बिफोर विकेट या पगबाधा आउट- क्रिकेट के खेल में यदि गेंदबाज द्वारा फेंकी गई गेंद सीधी विकेट पर जा रही हो और बल्लेबाज ने उसे जाने या अनजाने में अपने पैरों या शरीर के किसी भी अन्य अंग से रोक लिया तो ऐसी स्थिति में अम्पायर बल्लेबाज को आउट करार दे सकता है। इस प्रक्रिया को ही लेग बिफोर विकेट या पगबाधा आउट कहते हैं।

क्लीन बोल्ड- जब गेंदबाज द्वारा फेंकी गई गेंद से विकेट के ऊपर रखी गिल्ली गिर जाए या विकेट उखड़ जाय तो उसे ''क्लीन बोल्ड'' कहते हैं।

वाइड बाल- यदि गेंदबाज गेंद को बल्लेबाज की पहुंच से दूर फेंकता है तो अम्पायर उसे वाइड बाल करार देता है। ''वाइड बाल'' से बल्लेबाजी कर रही टीम के स्कोर में एक रन का इजाफा होता है।

बाई- यदि कोई गेंद न तो 'नो बाल' हो और न ही 'वाइड बाल' और यदि वह बल्ले या बल्लेबाजी कर रहे व्यक्ति के शरीर को छुये बिना बहुत आगे निकल जाए तो इस स्थिति में बल्लेबाज जितने रन दौड़कर बनाता है उसे 'बाई' कहते हैं।

लेग बाई- 'बाई' की स्थिति में ही यदि गेंदबाज या विकेटकीपर को छुते हुए आगे निकल जाए तो इसके दौरान बल्लेबाज जो रन बनाता है, उसे 'लेग-बाई' कहते हैं।

रन आउट- जब बल्लेबाज रन लेने के लिए दौड़े और उसके क्रिज में पहुंचने से पहले यदि क्षेत्ररक्षक द्वारा गेंद को विकेट पर मार दिया जाता है तो बल्लेबाज रन आउट हो जाता है।

नो बाल- यदि कोई गेंदबाज गेंद फेंकते समय गेंद को 'थ्रो' करता हो या गेंदबाजी करते समय उसके अगले पैर का हिस्सा ''पॉपिंग क्रीज'' के पीछे न हो अथवा वह पिछले पैर को रिटर्न क्रीज पर या इसकी बढ़ाई गई लाइन के भीतर न रखता हो तो ऐसी गेंदो को अंपायर “नो बाल” करार देता है। 'नो बाल' के लिए बल्लेबाजी करने वाली टीम को एक अतिरिक्त रन प्रदान किया जाता है और इसकी गणना फेंके गए गेंदों की संख्या में नहीं की जाती है। आईसीसी के नये नियमों के अनुसार 'नो बाल' करार दी गई गेंद को बल्लेबाज हिट करके रन ले सकता है तथा वह ऐसी गेंद पर न कैच आउट, न स्टम्प्स और न ही बोल्ड आउट होता है।

बाउंसर-ऐसी गेंद जो बल्लेबाज के कंधे से ऊपर की ऊंचाई से निकलती हो, बाउंसर कहलाती है।

हिट-विकेट-यदि बल्लेबाज शॉट खेलते समय या पहले रन के लिए भागते समय विकेट को बल्ले या शरीर के किसी भी भाग से गिरा देता है, तो हिट विकेट आउट माना जाता है।

फालोऑन-फालोऑन का नियम सबसे पहले 1894 ई. में दक्षिण अफ्रीका और विक्टोरिया के बीच मैच में लागू हुआ। फालोऑन की स्थिति तब उत्पन्न होती है जब कोई टीम टेस्ट मैचों में अपनी पहली पारी में इतना रन बना ले कि विपक्षी टीम अपनी बल्लेबाजी की प्रथम पारी में उस स्कोर से काफी कम रन बनाए, तो पहली टीम का कप्तान विपक्षी टीम को तत्काल दूसरी पारी खेलने के लिए कह सकता है। इसके लिए आवश्यक है कि 5 दिवसीय मैच में दूसरी टीम की रन संख्या पहली टीम की रन संख्या से कम से कम 200 रन कम हो तथा तीन या चार दिवसीय मैच में 150 रन से कम हो।