Thursday, December 30, 2010

लक्ष्मण और जहीर ने की स्मिथ की बोलती बंद

डरबन। दक्षिण अफ्रीकी कप्तान ग्रीम स्मिथ की बोलती बंद करते हुए भारतीय टीम ने किंग्समीड स्थित सहारा क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए दूसरे टेस्ट मैच में दक्षिण अफ्रीका को 87 रनों से हरा दिया। इस जीत ने भारत को तीन मैचों की श्रृंखला में 1-1 की बराबरी पर ला दिया है। इस जीत के बाद स्मिथ भी जान गए हैं कि क्यों टीम इंडिया ही विश्व की नंबर एक टेस्ट टीम का ताज पहनने की हकदार है।


इस टेस्ट मैच में भारत उन अहम मौकों को नहीं चूका जो मैच का रूख बदल सकती थी। या यूं कहें कि मैच का हर टर्निंग प्वाइंट भारत के पाले में गया। चाहे वह मुश्किल कैच हो या नॉन स्ट्राइकर छोर पर कैलिस का रन आउट। इसके साथ दूसरी पारी में लक्ष्मण और जहीर खान के बीच 70 रनों की जुझारू साझेदारी ने टीम के लिए जीत का आधार रखने का काम किया।



दरअसल डरबन टेस्ट मैच आईसीसी की उन कोशिशों को और मजबूती देता है जिसमें इस खेल के सबसे लंबे फॉर्मेट को बढ़ावे देने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। क्योंकि लगभग चार दिनों में खत्म हुए इस मुकाबले में हर सत्र में खेल का रूख बदलता था। जहां पहला दिन साउथ अफ्रीका के नाम रहा तो दूसरा दिन टीम इंडिया के पाले मे। क्रिकेट पंडितों के लिए यह अनुमान लगा पाना मुश्किल हो गया था कि मैच में किस टीम का पलड़ा भारी है।

मैच के असली हीरो रहे वैरी वैरी स्पेशल लक्ष्मण, लक्ष्मण ने दूसरी पारी में 96 रनों की पारी खेल ये जता दिया की वो धोनी के असली लक्ष्मण हैं। उनकी यह पारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि ये पारी उस समय खेली गई जब भारतीय टीम के धुरंधर पानी मांगते नज़र आ रहे थे। सचिन को भारतीय क्रिकेट का भगवान कहा जाता है लेकिन  लक्ष्मण भारतीय क्रिकेट के ब्रम्हा हैं जो ऐसे समय प्रकट होते हैं जब टीम को असली में उनकी जरुरत होती है। लक्ष्मण कितने बड़े खिलाड़ी हैं ये अब दक्षिण अफ्रीका को भी समझ में आ गया होगा।

लक्ष्मण के बाद बात करते हैं जहीर खान की। उनकी अनुपस्थिति में पहले टेस्ट मैच में भारतीय गेंदबाज स्कूल टीम के गेदबाजों की तरह गेंदबाजी कर रहे थे। लेकिन दूसरे टेस्ट मैच में जहीर के आते ही मानो भारतीय गेंदबाजों की गेंदबाजी में तूफान आ गया। पहले टेस्ट में जहाँ दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाजों ने 4 विकेट पर 620 रन बनाये थे वहीँ दूसरे टेस्ट में पहली पारी में मात्र 131 और दूसरी पारी में केवल 215 रन ही बनाने में सफल हो सके।
    
दूसरे टेस्ट मैच के चौथे दिन भारत को जीत के लिए सात विकेट चटकाने थे। भारतीय गेंदबाजों ने तीसरे दिन नाबाद लौटे जैक्स कैलिस (17) और अब्राहम डिविलियर्स (33) समेत मार्क बाउचर (1), डेल स्टेन (10), पॉल हैरिस (7), लोनवालो त्सोत्सोबे (0) और मोर्न मोर्कल (20) को आउट कर जीत हासिल की।

डरबन टेस्ट मैच में ऐसे कई मौकों आए जिन्हें टर्निंग प्वांइट कहा जा सकता है। स्विंग और उठाल भरी पिच पर ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह का प्रदर्शन, टीम इंडिया का क्षेत्ररक्षण, जहीर खान की वापसी और कभी न हार मानने वाले भारत के रवैये ने मैच के साथ सीरीज का रूख भी बदलकर रख दिया है।

Sunday, December 19, 2010

सचिन "रिकॉर्ड" तेंदुलकर

क्रिकेट की किवदंती बन चुके महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर की तारीफ के लिए शायद बड़े से बड़े लेखक के पास भी अब शब्दों की कमी हो गई होगी। मास्‍टर ब्‍लास्‍टर ने सेंचुरियन के सुपर स्पोर्ट मैदान पर रविवार को 50वां टेस्ट शतक जमाकर इतिहास रच दिया। ऐसा करने वाले वो विश्व के पहले और एकमात्र बल्लेबाज हैं।  यह शतक उस खिलाड़ी ने लगाया जो पिछले 22 वर्षों से लगातार क्रिकेट खेल रहा है। आज भारत सहित पूरे विश्व क्रिकेट में सिर्फ तेंदुलकर के 50 वें शतक की चर्चा है।

क्रिकेट हो या राजनीति हमेशा से भारत का विरोधी रहा पाकिस्तान भी इस महान बल्लेबाज की तारीफ करते नहीं थक रहा है। पाकिस्‍तानी टीम के पूर्व कप्‍तान राशिद लतीफ ने कहा, 'तेंदुलकर क्रिकेट के इतिहास में सबसे महान बल्‍लेबाज का खिताब पाने के हकदार हैं।

जिस टीम के खिलाफ सचिन ने शतकों का अर्धशतक पूरा किया उसके कप्तान ग्रीम स्मिथ ने भी मास्टर को बधाई दी है। दक्षिण अफ्रीकी कप्तान लिखते हैं, 'सचिन को उनके 50वें शतक की शुभकामनाएं। कभी कभी आपको वो करना पड़ता है जो कि आपका काम है, भले ही आपका वो करने का मन हो या नहीं। हमने अंतिम सत्र में अपने लिए रास्ता बना लिया है।'

यही नहीं बड़ी-बड़ी हस्तियां भी मास्टर के इस कारनामे को नमन कर रही हैं। सुरों की मलिका आशा भोंसले ने ट्विटर पर लिखा है, सचिन को बहुत-बहुत बधाई। यदि सचिन अब भी भारत रत्न पाने का अधिकार नहीं रखते तो उन्हें इस सम्मान से कब नवाजा जाएगा।


दुनिया के महानतम बल्लेबाज सचिन ने इस पारी के दौरान मौजूदा कैलेंडर वर्ष में अपने 1500 रन भी पूरे कर लिए। उन्होंने करियर में पहली बार कैलेंडर वर्ष में 1500 से ज्यादा रन बनाए हैं। इससे पहले एक कैलेंडर वर्ष में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 1392 रन था जो उन्होंने 2002 में बनाया था। उन्होंने एक कैलेंडर वर्ष में छठी बार 1000 से ज्यादा रन पूरे किए हैं। वे इससे पहले 1997, 1999, 2001, 2002 और 2008 में 1000 से ज्यादा रन बना चुके हैं।

अपने करियर के शुरुआत मे सचिन की खेल शैली आक्रामक हुआ करती थी। सन् 2004 से वे कई बार चोटग्रस्त रहे हैं। इस वजह से उनके क्रिकेट जीवन को समाप्त मन जाने लगा था। पूर्व ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी ईयन चैपल ने तो यहाँ तक कह दिया था कि तेंदुलकर अब पहले जैसे खिलाड़ी नहीं रहे। किन्तु 2008 में भारत के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर तेंदुलकर ने कई बार अपनी आक्रामक बल्लेबाज़ी का परिचय दिया। इसके बाद सचिन रुके नहीं और अपने हर आलोचना का करार जवाब दिया।

टेस्ट ही नहीं एकदिवसीय मैचों में भी सचिन रिकार्डों के बादशाह हैं। एकदिवसीय मैचों में सचिन ने अब तक 48 शतक लगाये हैं। चौबीस फरवरी का दिन हर भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के जेहन में ताजा होगा। ग्वालियर के कैप्टन रुप सिंह स्टेडियम में इसी दिन क्रिकेट के सुपरमैन सचिन रमेश तेंदुलकर ने दक्षिण अफ्रीका के ही खिलाफ धुआंधार पारी खेलते हुए सिर्फ 147 गेंदों में 25 चौकों, 3 गगनचुम्बी छक्कों की मदद से नाबाद 200 रन बनाए थे।

एकदिवसीय क्रिकेट के इतिहास के 40 साल और 2,961 मैचों के बाद कोई खिलाड़ी पहला दोहरा शतक लगाने में कामयाब हुआ है। इनके एकदिवसीय रिकॉर्ड का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इनका एकदिवसीय रिकॉर्ड टीम के शेष दस खिलाड़ियों के कुल रिकॉर्डो से श्रेष्ठ है। अब क्रिकेट प्रेमियों को इंतजार है सचिन के शतकों के शतक के जिससे वो सिर्फ दो कदम दूर हैं। मास्टर ब्लास्टर साल दर साल अपने प्रदर्शन से अपने आलोचकों को चौंकाते रहे हैं। टॉप ग्रेड के उनके खेल के कारण ही वे सफलता के शीर्ष पर बने हुए हैं। उनकी उपलब्धियां अद्भुत हैं। इन सारी खूबियों के बावजूद वे जमीन से जुड़े व्यक्ति हैं। हर कोई सचिन के इस 50 वें शतक की पारी को देखकर गदगद है।

Sunday, December 12, 2010

बाजारू बहाव में बांध बने सचिन

भारत के महान बल्लेबाज सचिन रमेश तेंदुलकर ने वार्षिक 20 करोड़ रुपए के शराब कंपनी का विज्ञापन ठुकरा कर जता दिया कि भारत में क्यों उन्हें भगवान की उपाधि प्राप्त है। सचिन एक महान क्रिकेटर का ही नहीं, बल्कि एक ऐसी शख्सियत का नाम है, जो अपनी सामाजिक जिम्‍मेदारियों के प्रति भी पूरी तरह से सजग हैं।

सचिन ने अपने इस फैसले से विश्व क्रिकेट जगत में धन कमाने की लालसा को खत्म करने की पहल की है। इससे न केवल नई पीढ़ी के उभरते क्रिकेटरों को बड़ी प्रेरणा मिलेगी; बल्कि क्रिकेट में मैच फिक्सिंग जैसे कारनामे करने वालों के मुंह पर भी बड़ा तमाचा लगेगा।

सचिन तेंदुलकर ने यह प्रस्ताव इसलिए ठुकराया कि उन्होंने अपने पिता रमेश तेंदुलकर से वादा किया था कि वह शराब, तंबाकू और ऐसी किसी चीज का प्रचार नहीं करेंगे, जिसका युवाओं पर गलत असर पड़े। अपने इसी वादे को निभाते हुए मास्टर ब्लास्टर ने इस विज्ञापन के प्रस्ताव को ठुकरा दिया। सचिन खुद भी शराब और तंबाकू उत्पादों के प्रचार के सख्त खिलाफ रहे हैं।

वहीं दूसरी तरफ, टीम इंडिया के युवा कप्तान महेंद्र सिंह धोनी दोनों हाथों से धन बटोर रहे हैं। पहले विजय माल्या की यूबी ग्रुप के 26 करोड़ रुपए और फिर उसके बाद मैक्स मोबाइल से 29 करोड़ रुपए का अनुबंध। विज्ञापन की इस दौड़ में धोनी ने कभी उसूलों का ख्याल नहीं रखा। पैसा कमाने के लिए धोनी ने व्हिस्की बनाने वाली रॉयल स्टेग के लिए विज्ञापन किए हैं।

सिर्फ धोनी ही नहीं बल्कि हरभजन सिंह, गौतम गंभीर और युवराज सिंह जैसे खिलाड़ी भी सोडा के नाम पर शराब बेचने वाली इस कंपनी के लिए विज्ञापन करते हैं। युवा बल्लेबाज विराट कोहली तो बॉलीवुड बाला जिनेलिया के साथ एक घड़ी और बैग के विज्ञापन में एक बिगड़ैल लड़के की भूमिका में दिखते हैं। कभी वो जिनेलिया के साथ इश्क फरमाते हैं तो कभी प्यार की निशानी को छुपाने के प्रयासों में जुटे दिखते हैं।

अभी वो बात लोगों के जेहन में ताजा होगी जब हरभजन सिंह एक शराब के विज्ञापन में अपने केश खोलकर नजर आये थे, जिसके बाद धार्मिक संगठन भड़क गये थे। बाद में हरभजन को माफी मांगनी पड़ी थी। ये सभी खिलाड़ी अभी युवा हैं, लेकिन यूथ आइकन होने के नाते इस प्रकार के विज्ञापन करना टीम इंडिया की इमेज को खराब करता है। इन सभी खिलाड़ियों को सचिन से सीख लेने की जरूरत है।

सचिन ने क्रिकेट के अलावा विज्ञापन की दुनिया में भी कई ऊंचाइयों को छू रखा है, लेकिन इसके लिए उन्होंने कभी अपने उसूलों से समझौता नहीं किया। सचिन ना तो कभी किसी चेहरे की रंगत बढ़ाने वाली क्रीम का प्रचार करते दिखे और ना ही कभी सिगरेट या शराब के विज्ञापन में।

सचिन की यही वो बात है जो उन्हें केवल एक महान क्रिकेटर ही नहीं, बल्कि एक महान इंसान बताती है।

Sunday, November 14, 2010

भज्जी तुस्सी ग्रेट हो.......

नई दिल्ली एक विशुद्ध गेंदबाज की हैसियत से टीम इंडिया में एक दशक से सेवाएं दे रहे हरभजन इन दिनों बल्ले से भी गजब का कमाल दिखा रहे हैं। हरभजन सिंह एक गेंदबाज के रूप में एक टेस्ट सीरीज में सर्वाधिक रन बनाने वाले पहले बल्लेबाज बन गए हैं। हरभजन  न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट श्रृंखला में अब तक दो शतक और एक अर्धशतक के साथ 295 रन बना चुके हैं। इस श्रृंखला में भज्जी ने विस्फोटक बल्लेबाज वीरेन्द्र सहवाग को भी पीछे छोड़ दिया हैसहवाग ने एक शतक के साथ सीरीज में अब तक 270 रन बनाए हैं
जानकारी हो कि हरभजन ने न्यूजीलैंड के खिलाफ अहमदाबाद टेस्ट में शानदार 69 और  115 रनों की पारी खेली। इसके बाद दूसरे टेस्ट में भी टीम इंडिया को मुश्किल से उबारते हुए उन्होंने लगातार नाबाद दूसरा शतक (111)जड़कर इतिहास रच दिया है।

उल्लेखनीय है कि आठवीं पोजिशन पर लगातार दो शतक लगाने वाले वो दुनिया के पहले खिलाड़ी हैं। इस सैकड़े के साथ ही भज्जी लगातार दो टेस्ट में दो शतक पूरा करने वालों की जमात में शामिल हो गए हैं। इस जमात में विजय हजारे, पाली उमरीगर, सुनील गावसकर सचिन तेंडुलकर, अजहरुउद्दीन, वीरेंद्र सहवाग, राहुल द्रविड़, गौतम गंभीर, जैसे दिग्गज बल्लेबाज शामिल हैं।
लगातार दो शतक जमाने वाले तो कई बल्लेबाज हैं, पर गेंदबाज के रूप में सिर्फ हरभजन सिंह ने यह कारनामा किया है।

वैसे लगातार छह टेस्ट में छह शतक जमाने का विश्व रिकार्ड डान ब्रेडमैन के नाम हैं। पांच टेस्ट शतक का रिकार्ड जैक कैलिस, मोहम्मद यूसुफ और गौतम गंभीर के नाम है। चार शतक जमाने वालों की सूची में 15 खिलाड़ियों के नाम हैं। तीन शतक जमाने वालों में 53 बल्लेबाज शामिल हैं।

Monday, October 25, 2010

19वें भ्रष्टाचार खेलों का स्वर्ण किसको?

खेलों के अर्धकुम्भ 19वें राष्ट्रमंडल खेलों के ख़त्म होने के बाद अब घपले की जाँच का नया खेल शुरू हो गया है। अब देखना ये है कि इस खेल में कौन जायगा और कौन बचेगा? भ्रष्टाचार का स्वर्ण पदक कौन जीतेगा? राष्ट्रमंडल खेल रूपी इस अर्धकुम्भ के भ्रष्टाचार के खेल में कई बड़े खिलाड़ी प्रतियोगिता का स्वर्ण जीतने के लिए मैदान में हैं। सुरेश कलमाड़ी और दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित इस दौड़ में सबसे आगे हैं। इनके अलावा और भी कई खिलाड़ी हैं जो समय के साथ-साथ पदक की दौड़ में शामिल होते जायेंगे।

यह प्रतियोगिता राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी मिलने के साथ ही शुरू हो गई थी। खेलों की मेजबानी के साथ देश का सम्मान भी जुड़ा हुआ था, लेकिन राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारियों में लापरवाही, पैसों की बर्बादी, भ्रष्टाचार और कथित घोटाले जितने निराशाजनक हैं उतने ही क्षुब्ध करने वाले भी हैं। राष्ट्रमंडल खेलों के इस आयोजन पर शुरु में कुल 63,284 करोड़ रुपयों के खर्च होने का अनुमान लगाया गया था। इसमें दिल्ली सरकार का अपना योगदान 16,000 करोड़ रुपयों का था। लेकिन ताजा आकलन के अनुसार सभी परियोजनाओं को पूरा करने में अनुमान से कहीं ज्यादा तकरीबन 70 हजार करोड़ रुपये खर्च हुए हैं, या यूँ कहें कि ये खर्च जबरन किये गए, तो ज्यादा सही होगा।

राष्‍ट्रमंडल खेलों पर भ्रष्टाचार के इस खेल में आयोजन से जुड़ी 16 परियोजनाओं में केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने 2,500 करोड़ रुपए से अधिक के घपले का खुलासा किया।

सीवीसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि राष्ट्रमंडल खेल गांव का तरणताल, प्रशिक्षण हॉल और एथलेटिक्स ट्रैक सहित इन खेलों से जुड़ी 16 परियोजनाओं में निर्माण के दौरान भारी अनियमितता बरती गई है।

इसके अलावा दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए), केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) द्वारा नेशनल स्टेडियम और एसपीएम तैराकी स्थल में किए गए पुनर्निमाण कार्य के दौरान भी धांधली की गई है। इन परियोजनाओं में खेल संकुलों का उन्नयन और सड़कों को चौड़ा करने संबंधी परियोजनाएं शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि सीवीसी ने इस मामले में दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) सहित कुछ और एजेंसियों के अधिकारियों के विरुद्ध सीबीआई से जांच कराने को कहा है।

एक ओर जहाँ केंद्रीय सतकर्ता आयोग ने अपनी रिपोर्ट में यह कहा है कि ज़्यादातर निर्माण कार्य में प्रक्रिया संबंधी उल्लंघन पाए गए हैं, तो दूसरी ओर एक अनजानी सी कंपनी को लाखों पाउंड देने का मामला भी तूल पकड़ रहा है। ताज़ा मामला लंदन की एक ऐसी कंपनी का है जिसे लाखों पाउंड दिए गए। एक निजी टीवी चैनल ने अपनी विशेष रिपोर्ट में इस कंपनी पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं।

राष्ट्रमंडल खेलों के समापन समारोह के फौरन बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भ्रष्टाचार के खेल में शामिल सभी खिलाड़ियों के खिलाफ जांच के आदेश दे दिए। इस कड़ी में पहला कदम बढ़ाते हुए आयकर विभाग ने भ्रष्टाचार के खेल में भाजपा नेता सुधांशु मित्तल के आवास पर तथा दिल्ली में कुल 25 स्थानों पर छापे मारे।

मित्तल खेलों के लिए स्पोर्टस के सामानों के सप्लायर दीपाली कन्सॉर्टियम से जुड़े रहे हैं। दीपाली कन्सॉर्टियम को राष्ट्रमंडल खेलों में खेल से संबंधित सामानों की सप्लाई का ठेका मिला हुआ था। लेकिन मित्तल पर संदेह कहीं न कहीं सरकार द्वारा विपक्षी दल भाजपा को घेरने कि साजिश ही प्रतीत होती है, क्योंकि मित्तल ने तो अन्य ठेकेदारों की तरह सिर्फ टेंडर ही भरा यानी उन्होंने व्यापार किया। उनका टेंडर पास करना तो आयोजन समिति के हाथों में था।

इनके अलावा राष्ट्रमंडल खेल समिति के सदस्य हरीश शर्मा के घर पर भी छापेमारी की गई। खेल परियोजनाओं से जुड़े दिल्ली के तीन-चार अन्य ठेकेदारों के ठिकानों पर भी छापेमार की गई है। सवाल यह उठता है कि मित्तल और अन्य ठेकेदारों के साथ-साथ उन्हें ठेका देकर आयोजन समिति भी कहीं न कहीं दोषी है। फिर मित्तल सहित अन्य ठेकेदारों के ठिकानों पर ही छापे क्यों ? यह एक बड़ा प्रश्न है।

अब बात करते हैं खेल गाँव की, जहाँ खिलाड़ियों को ठहरना था। खेल गाँव को बनाने का ठेका एएमआर-एमजीएफ को मिला था लेकिन कम्पनी ने काम समय पर पूरा नहीं करके पूरे विश्व में भारत को शर्म से झुकने पर मजबूर कर दिया। और तो और व्यवस्था में लगे स्वयंसेवकों को भी गन्दा खाना परोसा गया, जिसको पकाने का ठेका एकता शक्ति फाउन्डेशन को दिया गया था।

ये तो प्रतियोगिता में भाग ले रहे छोटे खिलाड़ी थे। इनके अलावा न जाने और कितने ऐसे खिलाड़ी हैं जो अभी तक सामने नहीं आये हैं। अब बात करते हैं प्रमुख खिलाड़ी सुरेश कलमाड़ी की, जिन्होंने अपनी साथी खिलाड़ी मुख्यमंत्री शीला दीक्षित पर निशाना साधते हुए कहा कि शीला के पास खेलों से जुड़ी तैयारियों के लिए 16,000 करोड़ का बजट था, लेकिन मैंने उन पर कभी भी किसी प्रकार का आरोप नहीं लगाया। मेरा बजट तो सिर्फ 16,00 करोड़ रुपये का था। निर्माण कार्य मेरे जिम्मे नहीं था। क्या शीला के पास इसका जवाब है?

प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने भी घोटालों के विजेता की घोषणा करने के लिए राष्ट्रमंडल खेलों की समाप्ति के बाद एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। पूर्व सीएजी (नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) वी.के. शुंगलू की अध्यक्षता में गठित यह समिति तीन महीने के अंदर प्रधानमंत्री को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।

खेलों में घपले की जाँच की प्रतियोगिता शुरू है और देखना यह है कि इस प्रतियोगिता का स्वर्ण पदक किसको मिलता है और विजेता को सरकार किस प्रकार सम्मानित करती है। हालांकि, इस जाँच के खेल को ड्रा करने के लिए कोई और खेल आयोजित किए जाने की भी संभावना व्यक्त की जा रही है।

Tuesday, October 19, 2010

नाच न जाने आँगन टेढ़ा

लाहौर। पाकिस्तान भारत को हमेशा नीचा दिखने की फ़िराक में लगा रहता है फिर वो चाहे राजनीति हो या खेल का मैदान। 19 वें राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के हाथों 7-4 से करारी शिकस्त झेलने के बाद अपने आपको बचाते हुए पाकिस्तान ने हार का ठीकरा भारतीय दर्शकों पर ही फोड़ दिया। अब पाकिस्तानियों को कौन समझाए कि खेल में प्रदर्शन अहम् होता हैं न कि दोषारोपण। भारतीय टीम जब पाकिस्तान में होती है तो उनपर भी दर्शक हुटिंग करते हैं भारतीय टीम तो कभी इस बात का रोना नहीं रोती।  

खैर पाकिस्तानियों ने अपने देश में खेलप्रेमियों के गुस्से से बचने के लिए भारतीय दर्शकों को ही हथियार बना लिया है।

पाकिस्तानी हॉकी टीम के कप्तान जीशान अशरफ ने कहा है कि राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान उनकी टीम को भारतीय दर्शकों के दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा है। नवंबर, 2008 के मुंबई हमले के बाद से भारतीय दर्शक पाकिस्तानी टीम के साथ उग्रता से पेश आते रहे हैं। खेलों के दौरान दर्शकों ने खिलाड़ियों से अपशब्द भी कहे, जिसका असर हमारे प्रदर्शन पर भी पड़ा।

पाकिस्तान हॉकी फेडरेशन (पीएचएफ) के सचिव आसिफ बाजवा ने भी भारतीयों पर आरोप लगते हुए कहा कि खिलाड़ियों को खेल के दौरान कठोर अपशब्दों का सामना करना पड़ा। भारतीय दर्शकों ने उनकी बेइज्जती भी की। मुंबई हमले के बाद पाकिस्तानी खिलाड़ियों के प्रति भारतीय दर्शकों का रवैया बदला है।

उल्लेखनीय है कि भारतीय हॉकी टीम ने विश्वकप और राष्ट्रमंडल खेलों में पाकिस्तान खिलाफ जीत दर्ज की थी। राष्ट्रमंडल खेलों में पाकिस्तानी टीम छठे स्थान पर थी।

Thursday, October 14, 2010

बेशर्म आस्ट्रेलियाई खिलाड़ी

नई दिल्ली। राष्ट्रमंडल खेलों में पदक तालिका में सबसे उपर रहे आस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों ने खेल गांव में लगातार दो रातों तक न सिर्फ हंगामा मचाया बल्कि तोड़फोड़ भी की। भारत के खिलाफ ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम की टेस्ट सीरीज में हार को ये खिलाड़ी पचा नहीं सके और मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के खिलाफ नारेबाजी भी की।

खेल गांव में मामला यहां तक बढ़ गया कि आस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों ने अपने कमरे में रखे फ्रिज को भी ऊपर से नीचे फेंक दिया। गनीमत तो यह रही कि कोई व्यक्ति इसकी चपेट में नहीं आया।

हद तो तब हो गई जब ऑस्ट्रेलियाई पहलवान हसन फकीरी ने भारतीय पहलवान अनिल कुमार से हारने के बाद हाथ मिलाने से ही इंकार कर दिया और रैफरी की तरफ अश्लील इशारे भी किए। एक ऑस्ट्रेलियाई साइक्लिस्ट ने दौड़ के दौरान लापरवाही से साइकिल चलाई, जिससे एक खिलाड़ी को गंभीर चोट आई। इन दोनों ही मामलों में खिलाड़ियों को खेल से बाहर कर दिया गया।

इतना सब हो जाने के बावजूद आयोजन समिति के अधिकारियों ने इस बाबत पुलिस से कोई शिकायत नहीं की है।