Wednesday, May 2, 2012

पूर्व बीसीसीआई अध्यक्ष एनकेपी साल्वे का निधन



नई दिल्ली, 01 अप्रैल (हि..) पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं क्रिकेट बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष एनकेपी साल्वे का रविवार सुबह एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। 90 वर्षीय साल्वे को भारतीय उपमहाद्वीप में क्रिकेट विश्व के आयोजन के लिए पहचाना जाता है। साल्वे ने भारत में 1987 में विश्व कप का आयोजन कराया था।

उनके परिवार में उनके पुत्र एवं जाने माने अधिवक्ता हरीश साल्वे तथा पुत्री अरुंधति हैं। उनकी पत्नी का उनसे कुछ समय पहले निधन हो गया था। सूत्रों ने बताया कि एनकेपी साल्वे को कुछ दिन पहले अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां उनका निधन हो गया। मध्य प्रदेश के छिन्दवाड़ा में जन्मे साल्वे वर्षों तक क्रिकेट प्रशासन से जुड़े रहे। साल्वे केंद्र सरकार  में मंत्री भी रहे और इस्पात तथा कुछ अन्य मंत्रालयों का प्रभार संभाला। उनके पार्थिव शरीर को रविवार रात नागपुर ले जाया जाएगा और अंतिम संस्कार सोमवार को होगा।

वर्ष 1987 मे हुए विश्व कप संस्करण को रिलायंस ने प्रायोजित किया था और इसी कारण इसे रिलायंस कप के नाम से जाना गया था। इससे पहले, 1975, 1979 और 1983 के विश्व कप का आयोजन प्रूडेंशियल कप के नाम से इंग्लैंड में हुआ था। क्रिकेट के जनक के तौर पर इंग्लैंड की साख उस समय इतनी जबरदस्त थी कि विश्व कप जैसे आयोजन के कहीं और कराने की बात सोची भी नहीं जा सकती थी। हालांकि साल्वे ने इस मिथक को तो़डते हुए भारत में विश्व कप का आयोजन कराया, जो बेहद सफल रहा। साल्वे के इसी प्रयास के सम्मान में बीसीसीआई ने उनके नाम से 1998 में एकदिवसीय घरेलू क्रिकेट टूर्नामेंट की शुरूआत की, जो इनके नाम पर एनकेपी साल्वे चैलेंजर ट्रॉफी के रुप में खेली जाती है।

एनकेपी साल्वे चैलेंजर सीरीज ट्रॉफी का आयोजन रणजी सत्र की शुरूआत से ठीक पहले अक्टूबर में होता है। इसमें तीन टीमें हिस्सा लेती हैं, जिन्हें इंडिया रेड, इंडिया ब्ल्यू और इंडिया ग्रीन नाम से जाना जाता है। वर्ष 2006 तक इस टूर्नामेंट में हिस्सा लेने वाली टीमों को इंडिया सीनियर, इंडिया- और इंडिया-बी के नाम से जाना जाता था। इंडिया सीनियर ने सबसे अधिक छह बार यह खिताब जीता है।

हिन्दुस्थान समाचार/01.04.2012/आकाश।

ओलम्पिक खेल की सुरक्षा में मिसाइल का प्रयोग वाजिब

लंदन, 02 मई (हि..) ब्रिटिश सेना ने ओलिम्पिक खेलों की सुरक्षा के मद्देनजर खेल स्थलों के आसपास की बहुमंजिला इमारतों की छतों पर जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइलें तैनात करने की बात कही है। उनका कहना है कि ओलम्पिक खेल देश के लिए काफी महत्वपूर्ण है। ऐसे में ओलिम्पिक को 9/।। जैसे आतंकवादी हमलों से बचाने और निर्विघ्न संपन्न कराने के लिए ओलिम्पिक स्थलों के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किये जाने जरुरी हैं।

ब्रिटेन ओलम्पिक खेल को लेकर इस कदर तैयारियों में जुड़ा है कि देश में शांतिकाल का यह सबसे बड़ा सुरक्षा ऑपरेशन हो। इसके लिए अंग्रेज सैनिक अगले सप्ताह ओलिम्पिक पार्क के आसपास की छह जगहों पर मिसाइल डिफेंस सिस्टम का परीक्षण करेंगे। इनमें पूर्वी लंदन में ओलिम्पिक पार्क की एक बहुमंजिला इमारत बो-क्वार्टर हाउसिंग डेवलपमेंट परिसर की पानी की एक टंकी पर मोबाइल बैटरी तैनात की जा रही है। ताकि किसी भी आंतकी हमले के लिए कोई गुंजाईश ना बचे। ओलिम्पिक सुरक्षा अभियान के प्रमुख जनरल सर निक पार्कर ने कहा, ‘हम सबसे बुरी स्थिति से निपटने की तैयारी कर रहे हैं कि सबसे अधिक संभावना वाली स्थिति की। मैं जानता हूं कि यह असामान्य है और लोग इससे चिंतित हैं लेकिन व्यापक सुरक्षा के लिए हमें ऐसे इंतजाम करने ही पड़ेंगे।’

ब्रिटिश सेना प्रमुख के अनुसार, मिसाइल की तैनाती के कारण आसपास के लोगों को दिक्कतें होंगी, उन्हें यह सब असामान्य लगेगा लेकिन सुरक्षा इंतजाम लोगों की हतप्रभता से ज्यादा जरुरी है। गौरतलब है कि इराक और अफगानिस्तान में अमेरिकी हमले के सबसे बड़े समर्थक रहे ब्रिटेन आतंकवादियों के निशाने पर है। ऐसे में ओलिम्पिक खेलों के आयोजन की मेजबानी को आतंकी हमलों का शिकार बनाना उनका सबसे बेहतर प्रयास हो सकता है।

हिन्दुस्थान समाचार/02.05.2012/आकाश।

Saturday, April 9, 2011

ऐतिहासिक लम्हे के विश्वासघाती "चैम्पियंस"

जिस आईसीसी के अध्यक्ष को पत्रकारों को सम्मान देने की तमीज ना हो उसे हिन्दुस्तान के विश्व चैम्पियन को गुमराह करने का अधिकार किसने दिया। हिन्दुस्तान के विश्व चैम्पियंस देखते रह गए और कस्टम के कर्मचारियों ने अपनी ईमानदारी तले विश्वकप ट्राफी को कुचल दिए।

आईसीसी ने जो कुछ किया है उसे सुनेंगे तो खून खौल उठेगा। 28 साल के मेहनत को मटियामेट करके रख दिया है। ऐसी घटनाएं परंपराओं का हिस्सा नहीं होती और ना ही योजनाएं बनायी जाती हैं।यू हीं नहीं कोई विश्व विजेता बन जाता है। इसके लिए भरोसे की भट्ठी में तपना पड़ता है। जज्बातों को जरूरत की परखनली में उबलते हुए दिखाना पड़ता है।

भावनाओं के शेयर बाजार में भविष्य को दांव पर लगाना पड़ता है। तमन्नाओं की तीर निशाने पर चलानी पड़ती है। जुनून की हद से गुजरना पड़ता है। क्या कुछ नहीं किया हमारे दिलेर जांबाजों ने।पहले मगरूर कंगारूओ की टीम को पहले चोट किया फिर पाकिस्तान की धज्जियां उड़ायी। तब जाकर वानखेड़ें मैदान में श्रीलंका को रौंदने के लिए भारतीय टीम उतरी थी।

एक-एक गेंद के आगे देश का गुमान चल रहा था। एक एक शॉट पर भुजाएं फड़क रही थी। दिल के डैने बाज की तरह फड़फड़ाने लगे थे। उम्मीदों का उन्माद कहिए या उन्माद की उम्मीद। सांसे भारत में भी थमी थी और सांसे श्रीलंका में भी थमीं थी।एक एक पल चट्टान की तरह खिसक रही थी। वाकई ये मैच जज्बातों का था..ये मैच जीवट का था... मैच हुनर का था.. ये मैच हौंसले का था।

पलकें भी झपकने से इनकार कर दिया। लेकिन जैसे ही धोनी ने धमाके दार छक्का मारा। जज्बात दिल के दरवाजे तोड़ कर बाहर निकल पड़े। माफ किजिएगा हम ज्यादा जज्बाती हो गए...लेकिन क्या करे खुशी को संभाल नहीं पा रहे। मैच खत्म होते ही 11 खलनायक बन चुके थे और 11 विजयरथ पर सवार हो चुके थे। कभी ना खत्म होने वाली जश्न से देश सराबोर हो गया। जिस सचिन ने देश को 21 साल कंधे पर उठाया था उसी महानायक को पूरे खिलाड़ियों ने कंधे पर उठा लिया।

इतिहास रोज नहीं बनते। लेकिन ये भी सच है कि इतिहास बदलता है। 2 अप्रैल का दिन दोनों मुल्कों के लिए बाकी 364 दिनों की तरह नहीं रहने वाली। इस दिन हमारे महानायकों ने निर्वासन से आगमन और आगमनसे स्थापन तक का सफर पूरा करके शून्य से संभावनों का नया क्षितिज खोला है। आईसीसी अध्यक्ष माननीय शरद पवार की संदिग्ध मुस्कान ने भी कई राज खोले है। मैदान में मुस्कुरा तो ऐसे रहे थे जैसे ये ही जीतकर आए हों। महंगाई से इतर कोई पूछता नहीं लिहाजा अपनी पूरी ताकत ऐसे लोगों को नीचा दिखाने में झोंक देते है जिसे उठाने में उनका कोई श्रेय ना हो।

कहीं आते जाते भी नहीं....कैसे जाएंगे..इज्जत जो कम हो जाएगी। श्रीलंका से कप आ रहा था लेकिन मुम्बई के कस्टम विभाग के ईमानदार खिलाड़ियों ने कप को पहले ही मार लिया। सचिन,गंभीर,धोनी की सेना देखती रह गयी। 45 करोड़ की टैक्स माफी किया था। इस माफी पर क्या मुजरा किया है पवार साहब। और राजीव शुक्ला दबी जुबान से सच बोल रहे है। 121 करोड़ हिन्दुस्तानियों से विश्वासघात पर आईसीसी की सफाई में छिपी तिरस्कार की तीर से पूरे देश को आघात लगा है। सवाल ये है कि इस परंपरागत बेशर्मी का प्रतिरूप किसे माना जाए।

विजय गुप्ता

Tuesday, April 5, 2011

एक खेल ऐसा भी..........

खेल के जो रूप हाल ही में 2011  क्रिकेट विश्वकप में दखने को मिला है, वो शायद ही कभी फिर देखने को मिले। क्रिकेट तो हमेशा से ही हमारे देश में लोगों की आन बान और शान रहा है, यहां तक की क्रिकेट को धर्म की उपाधि तक दी गयी है। विश्वकप में फतह हासिल करने के बाद तो इस खेल ने अपनी सफलता की एक और इबारत लिख दी है और फिर से यह साबित कर दिया है कि क्यों क्रिकेट भारतवासियों की रग रग में समाया है। क्यों  अनिश्चितताओं का ये खेल लोगों के सोय हुए या फिर खोये हुए जज्बातों को जगा देता है। दौलत -शोहरत और संवेदनाओं से भरे इस खेल में इस बार जवान भारत का जोश भी नज़र आया और जीत का जज्बा भी। ये कहना बिलकुल गलत न होगा की इस विश्वकप में इंडिया एक बार फिर भारत बनकर सामने आया।

विश्वकप के दौरान भारतीय टी
म ने जिस जूनून का परिचय दिया वह निश्चित ही भारतवासियों के विश्वास और क्रिकेट के प्रति लगाव का ही नतीजा था। विश्वकप जीतकर एक और जहां भारतीय टीम ने पिछले 28 सालों से आये हुए सूखे को समाप्त किया वहीं सचिन के 21 बरस के करियर में जिस एक बात का मलाल था उसको भी  ख़त्म कर दिया है। क्रिकेट के इस महाकुंभ में भारतीय टीम के तेवर शुरुआत से ही विजेताओं जैसे रहे वही भारतीय टीम के समर्थकों का जोश भी पुरे चरम पर रहा

एक समय को बिखरी  हुई भारतीय टीम का मनोबल डिगा हुआ लग रहा था, ऐसी परिस्थितियों में भारतीय टीम के कोच का  काटों भरा ताज गैरी कर्स्टन ने पहना। यह गैरी कर्स्टन का ही करिश्मा है जिन्होंने भारतीय टीम को विश्व विजेता बनाया। विश्वकप जीतने के इस सफ़र के दौरान साउथ अफ्रीका से मुहं की खाने के बाद भारतीय टीम ने जीत की जो कभी न थमने वाली रफ़्तार पकड़ी वो निश्चित ही अद्वितीय रहीनॉक आउट मैचों में ऑस्ट्रेलिया और पकिस्तान के हौसले पस्त करने वाली भारतीय टीम अंतत विश्व विजेता बनकर उभरी

इस विश्वकप ने घंटों टीवी से चिपके रहने वाले और फेसबुक के जाल में फंसे दर्शक को भी क्रिकेट देखने के लिए मजबूर कर दिया रही सही कसर भारत-पाकिस्तान के रोमांचक सेमीफाइनल ने पूरी कर दी। कुलमिलाकर ये विश्वकप एक अरब से भी अधिक भारतियों के ख्वाबों को पूरा करने में सफल रहा, वहीं इस विश्वकप ने भारतीय टीम की कमजोरियों को भी छुपा दिया। क्रिकेट की इस जीत ने भारत में क्रिकेट की लोकप्रियता को और अधिक उचाई पर पंहुचा दिया है और हर भारतीय को स्वयं और देश पर गर्व महसूस करने के लिए मजबूर कर दिया। क्रिकेट की इस चमक ने लोगों की दबी हुई संवेदनाओं को फिर से उजागर तो किया ही साथ ही क्रिकेट के उस रोमांच को भी जगा दिया जो आइ.पी.एल. की धन वर्षा में कहीं खो सा गया था 


स्वाती जैन

Thursday, December 30, 2010

लक्ष्मण और जहीर ने की स्मिथ की बोलती बंद

डरबन। दक्षिण अफ्रीकी कप्तान ग्रीम स्मिथ की बोलती बंद करते हुए भारतीय टीम ने किंग्समीड स्थित सहारा क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए दूसरे टेस्ट मैच में दक्षिण अफ्रीका को 87 रनों से हरा दिया। इस जीत ने भारत को तीन मैचों की श्रृंखला में 1-1 की बराबरी पर ला दिया है। इस जीत के बाद स्मिथ भी जान गए हैं कि क्यों टीम इंडिया ही विश्व की नंबर एक टेस्ट टीम का ताज पहनने की हकदार है।


इस टेस्ट मैच में भारत उन अहम मौकों को नहीं चूका जो मैच का रूख बदल सकती थी। या यूं कहें कि मैच का हर टर्निंग प्वाइंट भारत के पाले में गया। चाहे वह मुश्किल कैच हो या नॉन स्ट्राइकर छोर पर कैलिस का रन आउट। इसके साथ दूसरी पारी में लक्ष्मण और जहीर खान के बीच 70 रनों की जुझारू साझेदारी ने टीम के लिए जीत का आधार रखने का काम किया।



दरअसल डरबन टेस्ट मैच आईसीसी की उन कोशिशों को और मजबूती देता है जिसमें इस खेल के सबसे लंबे फॉर्मेट को बढ़ावे देने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। क्योंकि लगभग चार दिनों में खत्म हुए इस मुकाबले में हर सत्र में खेल का रूख बदलता था। जहां पहला दिन साउथ अफ्रीका के नाम रहा तो दूसरा दिन टीम इंडिया के पाले मे। क्रिकेट पंडितों के लिए यह अनुमान लगा पाना मुश्किल हो गया था कि मैच में किस टीम का पलड़ा भारी है।

मैच के असली हीरो रहे वैरी वैरी स्पेशल लक्ष्मण, लक्ष्मण ने दूसरी पारी में 96 रनों की पारी खेल ये जता दिया की वो धोनी के असली लक्ष्मण हैं। उनकी यह पारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि ये पारी उस समय खेली गई जब भारतीय टीम के धुरंधर पानी मांगते नज़र आ रहे थे। सचिन को भारतीय क्रिकेट का भगवान कहा जाता है लेकिन  लक्ष्मण भारतीय क्रिकेट के ब्रम्हा हैं जो ऐसे समय प्रकट होते हैं जब टीम को असली में उनकी जरुरत होती है। लक्ष्मण कितने बड़े खिलाड़ी हैं ये अब दक्षिण अफ्रीका को भी समझ में आ गया होगा।

लक्ष्मण के बाद बात करते हैं जहीर खान की। उनकी अनुपस्थिति में पहले टेस्ट मैच में भारतीय गेंदबाज स्कूल टीम के गेदबाजों की तरह गेंदबाजी कर रहे थे। लेकिन दूसरे टेस्ट मैच में जहीर के आते ही मानो भारतीय गेंदबाजों की गेंदबाजी में तूफान आ गया। पहले टेस्ट में जहाँ दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाजों ने 4 विकेट पर 620 रन बनाये थे वहीँ दूसरे टेस्ट में पहली पारी में मात्र 131 और दूसरी पारी में केवल 215 रन ही बनाने में सफल हो सके।
    
दूसरे टेस्ट मैच के चौथे दिन भारत को जीत के लिए सात विकेट चटकाने थे। भारतीय गेंदबाजों ने तीसरे दिन नाबाद लौटे जैक्स कैलिस (17) और अब्राहम डिविलियर्स (33) समेत मार्क बाउचर (1), डेल स्टेन (10), पॉल हैरिस (7), लोनवालो त्सोत्सोबे (0) और मोर्न मोर्कल (20) को आउट कर जीत हासिल की।

डरबन टेस्ट मैच में ऐसे कई मौकों आए जिन्हें टर्निंग प्वांइट कहा जा सकता है। स्विंग और उठाल भरी पिच पर ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह का प्रदर्शन, टीम इंडिया का क्षेत्ररक्षण, जहीर खान की वापसी और कभी न हार मानने वाले भारत के रवैये ने मैच के साथ सीरीज का रूख भी बदलकर रख दिया है।

Sunday, December 19, 2010

सचिन "रिकॉर्ड" तेंदुलकर

क्रिकेट की किवदंती बन चुके महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर की तारीफ के लिए शायद बड़े से बड़े लेखक के पास भी अब शब्दों की कमी हो गई होगी। मास्‍टर ब्‍लास्‍टर ने सेंचुरियन के सुपर स्पोर्ट मैदान पर रविवार को 50वां टेस्ट शतक जमाकर इतिहास रच दिया। ऐसा करने वाले वो विश्व के पहले और एकमात्र बल्लेबाज हैं।  यह शतक उस खिलाड़ी ने लगाया जो पिछले 22 वर्षों से लगातार क्रिकेट खेल रहा है। आज भारत सहित पूरे विश्व क्रिकेट में सिर्फ तेंदुलकर के 50 वें शतक की चर्चा है।

क्रिकेट हो या राजनीति हमेशा से भारत का विरोधी रहा पाकिस्तान भी इस महान बल्लेबाज की तारीफ करते नहीं थक रहा है। पाकिस्‍तानी टीम के पूर्व कप्‍तान राशिद लतीफ ने कहा, 'तेंदुलकर क्रिकेट के इतिहास में सबसे महान बल्‍लेबाज का खिताब पाने के हकदार हैं।

जिस टीम के खिलाफ सचिन ने शतकों का अर्धशतक पूरा किया उसके कप्तान ग्रीम स्मिथ ने भी मास्टर को बधाई दी है। दक्षिण अफ्रीकी कप्तान लिखते हैं, 'सचिन को उनके 50वें शतक की शुभकामनाएं। कभी कभी आपको वो करना पड़ता है जो कि आपका काम है, भले ही आपका वो करने का मन हो या नहीं। हमने अंतिम सत्र में अपने लिए रास्ता बना लिया है।'

यही नहीं बड़ी-बड़ी हस्तियां भी मास्टर के इस कारनामे को नमन कर रही हैं। सुरों की मलिका आशा भोंसले ने ट्विटर पर लिखा है, सचिन को बहुत-बहुत बधाई। यदि सचिन अब भी भारत रत्न पाने का अधिकार नहीं रखते तो उन्हें इस सम्मान से कब नवाजा जाएगा।


दुनिया के महानतम बल्लेबाज सचिन ने इस पारी के दौरान मौजूदा कैलेंडर वर्ष में अपने 1500 रन भी पूरे कर लिए। उन्होंने करियर में पहली बार कैलेंडर वर्ष में 1500 से ज्यादा रन बनाए हैं। इससे पहले एक कैलेंडर वर्ष में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 1392 रन था जो उन्होंने 2002 में बनाया था। उन्होंने एक कैलेंडर वर्ष में छठी बार 1000 से ज्यादा रन पूरे किए हैं। वे इससे पहले 1997, 1999, 2001, 2002 और 2008 में 1000 से ज्यादा रन बना चुके हैं।

अपने करियर के शुरुआत मे सचिन की खेल शैली आक्रामक हुआ करती थी। सन् 2004 से वे कई बार चोटग्रस्त रहे हैं। इस वजह से उनके क्रिकेट जीवन को समाप्त मन जाने लगा था। पूर्व ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी ईयन चैपल ने तो यहाँ तक कह दिया था कि तेंदुलकर अब पहले जैसे खिलाड़ी नहीं रहे। किन्तु 2008 में भारत के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर तेंदुलकर ने कई बार अपनी आक्रामक बल्लेबाज़ी का परिचय दिया। इसके बाद सचिन रुके नहीं और अपने हर आलोचना का करार जवाब दिया।

टेस्ट ही नहीं एकदिवसीय मैचों में भी सचिन रिकार्डों के बादशाह हैं। एकदिवसीय मैचों में सचिन ने अब तक 48 शतक लगाये हैं। चौबीस फरवरी का दिन हर भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के जेहन में ताजा होगा। ग्वालियर के कैप्टन रुप सिंह स्टेडियम में इसी दिन क्रिकेट के सुपरमैन सचिन रमेश तेंदुलकर ने दक्षिण अफ्रीका के ही खिलाफ धुआंधार पारी खेलते हुए सिर्फ 147 गेंदों में 25 चौकों, 3 गगनचुम्बी छक्कों की मदद से नाबाद 200 रन बनाए थे।

एकदिवसीय क्रिकेट के इतिहास के 40 साल और 2,961 मैचों के बाद कोई खिलाड़ी पहला दोहरा शतक लगाने में कामयाब हुआ है। इनके एकदिवसीय रिकॉर्ड का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इनका एकदिवसीय रिकॉर्ड टीम के शेष दस खिलाड़ियों के कुल रिकॉर्डो से श्रेष्ठ है। अब क्रिकेट प्रेमियों को इंतजार है सचिन के शतकों के शतक के जिससे वो सिर्फ दो कदम दूर हैं। मास्टर ब्लास्टर साल दर साल अपने प्रदर्शन से अपने आलोचकों को चौंकाते रहे हैं। टॉप ग्रेड के उनके खेल के कारण ही वे सफलता के शीर्ष पर बने हुए हैं। उनकी उपलब्धियां अद्भुत हैं। इन सारी खूबियों के बावजूद वे जमीन से जुड़े व्यक्ति हैं। हर कोई सचिन के इस 50 वें शतक की पारी को देखकर गदगद है।